वो अंगनाई क्यों हुई पराई – नीलांजना गुप्ता

मेरा रिश्ता जोड़ दिया दूजे आँगन से ओ बाबुल क्यों हुई पराई अब भी याद आती हैं मुझको वो गलियाँ वो अंगनाई क्यों हुई पराई भूल गए क्यों मैं भी…

भोजपुरी कृषि गीत –  श्याम कुंवर भारती

खेतवा जोतवले हइ, पनिया भरवले हइ। खेतवा निखार कके बियवा छिंटवले  हइ। लगवले हई महंग वाली मजदूरिया हो, पिया छोड़ा ना शहरिया। देखा आके आपन खेतबरिया हो। पिया छोड़ा ना…

फैसला – कंचन श्रीवास्तव

क्या सचमुच सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अमल किया जायेगा या इसका भी मज़ाक उड़ाया जायेगा वहां जहाँ स्त्रियों को सिर्फ़ भोग की वस्तु समझी जाती है वहां जहाँ चौखट के…

मेहंदी के पत्ते – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

मेहंदी के पत्ते चुपचाप हँसते, हरियाली में अपने रंग को रचते। कोमल डाली पर सपने सजाए, धूप में भी ठंडी छाया बन जाए। हाथों की रेखा में गीत उतारे, मन…

रक्त दान : महादान – डॉ अनमोल कुमार

ये कैसा दान है जो जेब से नहीं, रगों से निकलता है? ये कैसी पूजा है जो मंदिर में नहीं, अस्पताल में होती है? ये रक्तदान है – महादान है।…

तलवे चाटने का हुनर – पंकज शर्मा “तरुण 

vivratidarpan,com –  दुनिया के किसी भी देश के नेताओं में तलवे चाटने का हुनर नहीं पाया जाता। यह हुनर केवल बौद्धिक संपदा से ओत- प्रोत देश भारत में बहुतायत से…

आज – रुचि मित्तल

आज… घर की दीवारों ने मौन होकर माँ की साँसों को सुना है चूल्हे की आँच आज कम जली पर दुआओं की गर्मी हर कोने में फैली रही मुट्ठी भर…

अंजन मसि से लिखूँ मैं पाती – सविता सिंह

सघन तम में मन विकल, नयन मरु में उमड़े बादल निज उर की ही थाह न पाती, अंजन मसि से लिखूँ मैं पाती। तुम मुझ में और मैं हूँ तुममें,…

गर्म हवा के झोंके चलते – अनिल भारद्वाज

आग उगलती दोपहरी यह अंगारे सा दिन, कब अषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। ज्वालामुखी ग्रीष्म ऋतु का तन लावा जैसा मन, कब अषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। सड़कों…

विश्व पर्यावरण दिवस – कविता बिष्ट

हरियाली हो गोद धरा की, पर्यावरण बचाओ। नवल पौध को देखो, सींचो, खुशहाली तुम लाओ।। लता, विटप, तरु, फूल, शजर अरु तरुवर खूब उगाओ। हरियाली हो गोद धरा की, पर्यावरण…