सावन आया, हरित धरा पर, छाई नई बहार।
भोले बाबा के चरणों में, झुकता है संसार।।
सोमवार का पावन अवसर, मन में भरे उजास।
हर-हर महादेव की ध्वनि से, गूँजे सकल आकाश।।
बेलपत्र, गंगाजल लेकर, भक्त करें अभिषेक।
शिव कृपा से मिट जाते हैं, जीवन के सब क्लेश।।
डमरू की मधुरिम धुन पर, नाचे भाव अपार।
नीलकंठ की महिमा गाएँ, देव और नर-ना
रुद्राक्षों की माला पहने, योगीश्वर भगवान।
भक्ति से जो शीश झुकाए, उसका हो कल्याण।।
सावन की हर बूंद सुनाए, शिव-शक्ति का गान।
भस्म-विभूति से शोभित तन, जग के पालनहार।।
मन मंदिर में दीप जलाकर, करें सदा सत्कर्म।
शिव भक्ति से मिलता जग में, सच्चा धर्म और कर्म।।
दुख के बादल दूर भगाकर, भर दें सुख का धाम।
भोले बाबा की कृपा से, रोशन हो हर ग्राम।।
आओ मिलकर व्रत रखें हम, करें शिव का ध्यान।
सावन सोमवार पावन है, देता शुभ वरदान।।
शिव शंकर का नाम जपें हम, मिट जाए अज्ञान।
हर-हर महादेव के जयघोष से, धन्य हो हिंदुस्तान।।
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव जगदलपुर,राजिम, छत्तीसगढ़
