सात सौ जैन मुनियों की रक्षा का भी पर्व है रक्षाबंधन – इंजी.अतिवीर जैन ‘पराग’

vivratidarpan.com – रक्षाबंधन यानी रक्षा का संकल्प। एक धागा जिसे बहनें भाई की कलाई पर बांधती हैं। इसका अर्थ है कि भाई उसकी सुरक्षा करेगा। पर राखी का यह धागा…

रक्षाबंधन (आलेख-प्रसंगवश) – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – रक्षासूत्र एक धागा भर नहीं, रक्षासूत्र और शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का प्रतीक है ।हर वर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ये त्यौहार होता…

‘सिचुएशनशिप’ से लेकर ‘सोलमेट’ तक – Gen Z के हर सवाल का गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने दिया उत्तर

vivratidarpan.com – आज एक आत्मीय और जीवंत संवाद में भारत के 1,300 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों—जिनमें IIT, IIM, NIT और AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं—के हजारों प्रथम-वर्षीय…

अफसर – प्रदीप सहारे

उद्दंड भतीजा, घूमता गाँव भर। उसकी करनी से, परेशान पूरा घर। होनहार चाचा, रहता था शहर। शहर में था, बड़ा अफसर। चाचा की पड़ी, भतीजे पर नज़र। बन गया भतीजा,…

शांति एवं कानून व्यवस्था भंग करने वालों पर पुलिस का शिकंजा, वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार

vivratidarpan.com नागल — वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहारनपुर के निर्देशन में अपराधों की रोकथाम एवं जनपद में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया…

स्वतंत्रता का सच्चा अर्थ जब विकास की रोशनी क्षेत्र के अंतिम छोर तक पहुँचे – अमन बिष्ट

vivratidarpan,com यमकेश्वर – स्वतंत्रता का सच्चा अर्थ तभी सार्थक होता है, जब विकास की रोशनी क्षेत्र के अंतिम छोर तक पहुँचे और हर व्यक्ति की आवाज़ सुनी जाए। आज हमारा‌…

संघर्ष के रंग – डॉ. प्रियंका सौरभ

सबके मन में दर्द है, सबकी अपनी पीर। हँसते चेहरे ढाँपते, भीतर की तस्वीर॥   धूप मिली तो क्या हुआ, छाया भी है संग। जीवन के हर मोड़ पर, चलते…

दण्डकारण्य माँ दंतेश्वरी साहित्य सम्मान से अलंकृत हुए कवि अशोक कुमार यादव

vivratidarpan.com मुंगेली। दण्डकारण्य साहित्य परिषद छत्तीसगढ़ की मासिक छत्तीसगढ़ी काव्य गोष्ठी 24 अगस्त 2026 को आयोजित की गई। इस काव्य गोष्ठी का उद्देश्य- छत्तीसगढ़ी भाखा का प्रचार-प्रसार करना और विकास…

जिन्दगी पर भारी पड़ती मोबाइल की लत – मनोज कुमार अग्रवाल

vivratidarpan.com – मोबाइल की लत बच्चों की दिनचर्या को एक दशक से बुरी तरह से प्रभावित कर रही है लेकिन अब तो यह जिन्दगी पर भी भारी पड़ने लगी है…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

अब स़ज़ी है ये म़ह़फिल भी आऐ सभी। रौनकें आज़ महफिल बढाऐ सभी।मतला   आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये। जान अपनी हमेशा लुटाऐ सभी।,   साज छेडो पिया तुम…