माँ का आँचल – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

माँ का आँचल धूप में जैसे ठंडी छाँव उतर आए, सूखे मन के आँगन में जैसे सावन गुनगुनाए।   जब दुनिया ने ठुकराया, माँ ने सीने से लगाया, टूटे हुए…

महाराणा प्रताप – डॉ अनमोल कुमार

अरि दल थर-थर काँप उठे थे, रण में जब हुंकार हुई, मेवाड़ों के सिंह प्रतापी की फिर जय-जयकार हुई। हाथों में थी तेज तलवारें, आँखों में अंगार लिए, मातृभूमि की…

जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वाधान में बही काव्य सरिता

vivratidarpan.com देहरादून – ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक राष्ट्रीय पंजीकृत संस्था के तत्वावधान में मातृ-दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक संगोष्ठी का सफल आयोजन श्री विनायक ज्वेलर्स, विनायक टावर, जी.एम.एस रोड,…

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी) 2026 आज से शुरू

नई दिल्ली। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी) 2026 आज से शुरू होगी। यह 11 से 31 मई के बीच कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में आयोजित की जाएगी। सीयूईटी-यूजी के लिए…

वीकेंड पर नैनीताल में पहुंचे 15 हजार से अधिक सैलानी

नैनीताल। इस वीकेंड पर सरोवर नगरी में 15 हजार से अधिक सैलानी नगर भ्रमण पर पहुंचे। नगर की रौनक में निखार रहा और पर्यटन कारोबारी बेहद खुश नजर आए। इस…

साहित्य जगत का अनमोल नाम रमेश चंद्र महेश्वरी – कुमार संदीप

vivratidarpan.com बिजनौर  – बिजनौर की साहित्यिक धरती को गौरवान्वित करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चन्द्र माहेश्वरी “राजहंस” आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ग्राम गंज दारानगर की पावन भूमि…

बिहार की साहित्यिक प्रतिभा : डॉ. निक्की शर्मा “रश्मि” – कुमार संदीप

vivratidarpan.com – बिहार की साहित्यिक प्रतिभा एवं एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. निक्की शर्मा “रश्मि” आज राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं।…

मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए ₹ 256 करोड की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य की विभिन्न विकास योेजनाओं के साथ ही कुम्भ मेला-2027 से संबंधित महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए ₹ 256 करोड की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की…

जय बजरंगबली – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

अंजनी के पुत्र आप, दूर करें कष्ट ताप. बल बुद्धि है असीम बड़े गुणवान हैं।   सर्वश्रेष्ठ राम भक्त, व्यर्थ नहीं करें वक्त, रघुवर के कार्य को करते प्रयाण हैं।…

छपकर बिकते थे कभी – प्रियंका सौरभ

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार, ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता…