अदालतों में न्याय-प्रतीक्षा में साढ़े चार करोड़ लोग – मनोज कुमार अग्रवाल

vivratidarpan.com – अपने देश में आम आदमी को न्याय मिलना काफी दुष्कर हो गया है। समय पर न्याय, न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास की आधारशिला है, जैसा कि इस…

वर्षा फुहार – श्याम कुंवर भारती

  आप अकेले क्यों भींग जाने लगे । बारिश में मुझे क्यों भूल जाने लगे।   रिमझिम फुहार वर्षा अंग सिहराये। यादों के झरोखों में बदन लहराए। हवाओं के संग…

स्त्री पुरुष संबंध – रेखा मित्तल

  मुड़ जाती हैं स्त्रियां बार बार उन रास्तों पर जहां वह रुसवा हुई नहीं तलाश पाती अपने लिए एक नया आसमान ऐसा प्रेमवश कतई नहीं पर शायद उन्होंने देखी…

लाइसेन्स निलंबित; शस्त्र जब्त; निरस्तीकरण की प्रकिया शुरू

देहरादून दिनांक 03 अगस्त 2025, पति अपनी पत्नी पर बात-2 में तान देता था बंदूक; डीएम सविन बंसल के सम्मुख दुखियारी पत्नि ने 1 अगस्त को गुहार लगाई थी, जिस…

मेरे राम – सुनील गुप्ता 

  ( 1 ) मेरे राम बसते मेरे मन मंदिर, करूँ उनकी पूजा, गुणगान उन्हीं के !!   ( 2 ) हैं वही मेरे प्रिय त्रिलोकी भगवान, उन्हीं की शरण,…

बेकदर शहर में – अनिरुद्ध कुमार

  भटक रहें बेकदर शहर में, कहाँ ठिकाना यहाँ नजर में।   मिले सहारा यहीं तमन्ना, नया मुसाफिर बनें इधर में।   हवा यहाँ पर करें शरारत, कहाँ इनायत रहें…

शक्ति दंभ और सनकी राजा (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी

  vivratidarpan.com – संसार में अनेक ऐसे सनकी राजा हुए हैं, जिन्होंने मनमाने निर्णय लेकर प्रजा को खूब तंग किया है। किसी ने अपनी सनक में चमड़े के सिक्के चलाकर…

माता-पिता को समर्पित ‘विमला ज्ञान साहित्य मंच’ पर ‘शिव/सावन/रक्षाबंधन’ विषयक काव्य गोष्ठी संपन्न

vivratidarpan.com सुधीर श्रीवास्तव- माता-पिता/ सास-ससुर की स्मृतियों को जीवंत रखने के उद्देश्य से अंजू श्रीवास्तव/ सुधीर श्रीवास्तव द्वारा स्थापित ‘विमला ज्ञान साहित्य मंच’ की प्रथम आभासी काव्य गोष्ठी का ‘शिव/सावन/रक्षाबंधन’ विषयक…

जीवन की अमूल्य धरोहर हैं माता-पिता – फौज़िया नसीम शाद

vivratidarpan.com – आज की निरंतर बदलती जीवनशैली और उपभोक्तावादी सोच ने हमारे सामाजिक संबंधों की बुनियाद को ही डगमगा दिया है। रिश्तों में प्रेम, विश्वास और अपनापन अब उतना सहज…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  जिंदगी मे यार कब रहबर मिले, प्यार के प्यासे सभी दिलबर मिले।   लौटना था आपका साहिल से बस, मैने कब सोचा मुझे ये भँवर मिले।   चाँद ढूँढे…