शिव विवाह – श्याम कुंवर भारती

चंद्रमा शिखर शिव जटा बीच गंग है बड़ा शोभत।

गले भुजंग भभूत सब अंग कर डमरू है बाजत ।

 

बिगड़ी बनाए योगी कहलाए

शिव बड़े है भोले भाले

हे कैलाश वाले ।

चले विवाह रचाने भोले शंकर

रूप बनाए महा भयंकर ।

 

बारात तुम्हारी भोले सबसे है निराली।

भूत पिशाच नाचे बजाइ के ताली।

औघड़ का रूप तेरा हे कैलाश वाले।

चले विवाह रचाने भोले शंकर ।

रूप बनाए महा भयंकर ।

 

अजब गजब के बाराती चले है।

रिक्ष राक्षस संग सारथी चले है।

भाग चले लोग सब देखन वाले

हे कैलाश वाले।

चले विवाह रचाने भोले शंकर।

रूप बनाए महा भयंकर।

 

ब्रम्हा विष्णु नारद चले इंद्रदेव सजकर।

देवता अप्सरा सजे गंधर्व बड़े हटकर।

नाग की माला भोला बड़ा फ़ुफ़कारे।

हे कैलाश वाले,

चले विवाह रचाने भोले शंकर,

रूप बनाए महा भयंकर।

 

दुल्हा का रूप देखी मैना माथा है पीटे।

औघड़ दूल्हा संग गौरा का भाग्य है फूटे ।

रूप बनाओ नाथ हे भोले भाले

हे पार्वती के चाहने वाले

चले विवाह रचाने भोले शंकर

रूप बनाए महा भयंकर।

 

सुन के पुकार गौरा शिव ने रूप है सजाया।

महाशिव रात्रि में शिव पार्वती विवाह रचाया।

आदि अनादि शिव जग के रखवाले

हे कैलाश वाले

चले विवाह रचाने भोले शंकर,

रूप बनाए महा भयंकर।

*हर हर महादेव*

– श्याम कुंवर भारती

बोकारो,झारखंड, मॉब .9955509286

 

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