कुछ अधूरा-सा
वह चले गए
चारों तरफ असीम शांति
मौन-सा पसरा हुआ
ऐसे लगा कुछ छूट गया
बहुत कुछ कहना था
सब कुछ अधूरा रह गया
अब कभी नहीं मिलेंगे
बस कुछ स्मृतियांँ शेष
उनकी कही,अनकही बातें
उनका रौबदार चेहरा
आज बिल्कुल शांत,खामोश
सौम्य,निश्छल,शिशुकी तरह
मालूम था,वह जाने वाले हैं
पर रोक नहीं पाए उनको
रुपया-पैसा, बंगला-गाड़ी
जड़ी-बूटी ,दवाई-दुआएंँ
प्यार ,स्नेह और ममता
कुछ भी काम न आया
शायद यही जीवन की सच्चाई है
अपनी जीवन यात्रा कर पूरी
भगवान के श्री चरणों में
वह चले गए!
– रेखा मित्तल,चंडीगढ़
