( 1 ) मुकरे
होंगे लोग जरूर,
तभी, कागज की पड़ी जरूरत !!
( 2 ) नाशुकरे
होंगे, वो मगरूर
तभी, कर बैठे ऐसी हिमाक़त !!
( 3 ) सिरफिरे
होंगे या खडूस,
वरना बुलाते न, स्वयं पे आफ़त !!
( 4 ) मुआशरे
के लिए जरूर,
वो छोड़ेंगे, अपनी बुरी आदत !!
( 5 ) मतवारे
होंगे या बावरे,
तभी करा बैठे, अपनी फ़ज़ीहत !!
मुआशरे= समाज या समुदाय
सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
