जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक संस्था ने आयोजित की साहित्यिक संगोष्ठी

vivratidarpan.com – जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में इंदिरा नगर स्थित चिन्मय स्कूल, देहरादून में अत्यंत गरिमामय वातावरण में साहित्यिक संगोष्ठी विधिवत संपन्न हुई।
मंचासीन अतिथियों में मुख्य अतिथि राजकुमार पुरोहित (पूर्व राज्य मंत्री), अति विशिष्ट अतिथि श्रीमती पदमा बंडारी (प्रधानाचार्य),चैतन्य स्कूल देहरादून, प्रसिद्ध गीतकार सतीश बंसल , संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, धीरेंद्र प्रताप सिंह (संपादक JK 24 x 7 न्यूज़ एवं स्टेट हेड, गुलिस्तान न्यूज़),अति विशिष्ट अतिथि अजय मोहन सिंह, विजय प्रसाद, इंद्राणी पांधा (वरिष्ठ संपादक, हिमाचल टाइम्स) उपस्थित रहे।
विशेष आमंत्रित कवियों में वीर रस के प्रतिष्ठित कवि मनोज चौहान (मैनपुरी, उत्तर प्रदेश) तथा श्रृंगार एवं हास्य के कवि डॉ. सुदेश यादव ‘दिव्य’ (मेरठ) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ ने अपने सुमधुर स्वर में वाणी वंदना प्रस्तुत कर किया। कार्यक्रम का सफल, सुगठित एवं व्यवस्थित संचालन संस्था की संयोजिका श्रीमती मणि ‘मणिका’ द्वारा किया गया। यह साहित्यिक आयोजन आमंत्रित कवियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों तथा देहरादून के प्रतिष्ठित कवि-कवयित्रियों की एक से बढ़कर एक सुमधुर रचनाओं से ऊर्जा एवं संवेदना से सराबोर रहा। सभी रचनाकारों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ की पंक्तियाँ— “मातृभूमि के जो प्रहरी हैं, आगे रहें तितिक्षा में”अत्यंत प्रेरणादायी रहीं।
श्रीमती मणिका ‘मणि’ की भावपूर्ण कविता “सबको हँसा-हँसा कर जाने क्यों रो गई , ने श्रोताओं की भरपूर सराहना बटोरी।
श्रीमती निशा अतुल्य की पंक्तियाँ— “मेरा कुछ अल्हड़पन लेकर लौटा बचपन धीरे-धीरे”मन को छू गईं।
डॉ. क्षमा कौशिक की कविता – “सिया राम सिया घर लौट रहे” ने श्रोताओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी उत्कृष्ट रचना— “हमारी दुनिया के मालिकों ने हमारी दुनिया बिगाड़ दी है,
कहीं पे जंगल जला रहे हैं, कहीं पे बस्ती उजाड़ दी है।”का प्रभावशाली वाचन किया।
अन्य रचनाकारों में लक्ष्मी प्रसाद बडोनी, कुमार विजय द्रोणी ने कामों के अंबार बहुत हैं जीने के आधार बहुत है कविता का शानदार वाचन किया।
भारती मिश्रा (“मैं समय की बेटी हूँ”) कविता से नारी शक्ति की शानदार संस्तुति की। सभी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देवभूमि की पावन मिट्टी में संवेदना, सौंदर्य-बोध एवं सामाजिक चेतना की अनुपम त्रिवेणी प्रवाहित की।
मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) से पधारे मनोज चौहान ने अपनी वीर रस की कविताओं से श्रोताओं में जोश एवं उत्साह का संचार किया, वहीं डॉ. दिवेश यादव ‘दिव्य’ की श्रृंगार एवं हास्य से ओत-प्रोत रचनाओं ने जन-मन को आह्लादित कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता का दायित्व निभाते हुए सतीश बंसल ने अपने सुमधुर गीतों से श्रोताओं की भरपूर तालियाँ अर्जित कीं।
मुख्य अतिथि श्री राजकुमार पुरोहित एवं अति विशिष्ट अतिथि तथा कार्यक्रम अध्यक्ष श्रीमती पदमा बंडारी ने अपने उद्बोधन में साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा संस्था के इस सराहनीय आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने विद्यालय परिसर में इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आभार व्यक्त किया।

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