ग़ज़ल – रीता गुलाटी

अब स़ज़ी है ये म़ह़फिल भी आऐ सभी।

रौनकें आज़ महफिल बढाऐ सभी।मतला

 

आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये।

जान अपनी हमेशा लुटाऐ सभी।,

 

साज छेडो पिया तुम हमारे लिये।

इक तराना अजी मिल के गाये सभी।

 

रात भर जागती ख्याब देखे बड़े।

साथ मिलकर चलो घर सजाये सभी।

 

जान देते हैं सरहद पे बैठे हुऐ।

अश्क बहते हमेशा मिटाए सभी।

 

जिंदगी मे सदा बस दुआएं मिले।

आपका जन्मदिन यूँ मनाऐ सभी।

 

यार मेरा बडा खूबसूरत दिखे।

दिल कहे पास अपने बुलाऐ सभी।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

 

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