हृदय की अदालत – सुनील गुप्ता

( 1 ) चलो
हृदय की अदालत में.,
अपने आप को प्रस्तुत करें !!
( 2 ) आओ
अपनी अंतरात्मा के समक्ष.,
आज खुद का बचाव करें !!
( 3 ) देखें
स्वयं को उसकी नजर से.,
और उन तथ्यों पे खरा उतरें !!
( 4 ) मिलें
हृदय अदालत न्यायाधीश से.,
और स्वयंको बेगुनाह साबित करें !!
( 5 ) सुनें
निष्पक्षता संग अंतरात्मा जज को.,
और नैतिक न्याय अनुसार चलें !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान |

 

 

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