ल़ोग करते बस ग़रीबों पर कहर हैं,
आज के अख़बार की ताजा ख़बर हैं।
आरजू मेरी तुम्हें बाँहों मे भर लूँ,
यार आँखो मे बसे तेरा श़हर है।
खो गया हूँ इश्क मे तेरे बता दूँ,
अब तो तेरी आँख पर मेरी ऩज़र है।
है शिकायत आपको मुझसे भला क्यो?
बिन तुम्हारे नाव अब मेरी भँवर है।
दूरियाँ तेरी हमे चुभने लगी है,
बिन तुम्हारे अब कठिन काटें स़फ़र है।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
