कोई हँसता हुआ गुलाब हो तुम,
न जाने किसका आफ़ताब हो तुम।
सरजमीं पर नहीं देखा तुमको,
किसी शायर का हसीं ख्वाब हो तुम।
चाँदनी में नहा कर आई हो,
वो बहकता हुआ शबाब हो तुम।
तुम्हारे हुश्न का अंदाज़े बयाँ,
अदाओं से जुदा अंदाज़ हो तुम।
-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश
