vivratidarpan.com गयाजी । विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर आजाद वेलफेयर सेंटर के सचिव सह गया के प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. के. के. कमर ने लोगों से हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक होने, समय पर जांच कराने तथा बचाव के उपाय अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस यकृत (लिवर) को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और कई मामलों में लिवर सिरोसिस तथा लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
डॉ. कमर ने बताया कि हेपेटाइटिस मुख्य रूप से वायरस के संक्रमण, दूषित भोजन एवं पानी, संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन तथा असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती अवस्था में इस बीमारी के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे मरीज को बीमारी का पता देर से चलता है।
उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस के प्रमुख लक्षणों में लगातार थकान महसूस होना, भूख में कमी, मतली एवं उल्टी, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, हल्का बुखार, आंखों और त्वचा का पीला पड़ जाना (पीलिया), गहरे रंग का पेशाब तथा वजन में कमी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए।
डॉ. कमर ने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। साफ और उबला हुआ पानी पीना, ताजा एवं स्वच्छ भोजन का सेवन करना, बाहर के दूषित खाद्य पदार्थों से बचना, इंजेक्शन और चिकित्सा उपकरणों का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना तथा हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है।
उन्होंने हेपेटाइटिस से पीड़ित लोगों को खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि तैलीय एवं मसालेदार भोजन, अत्यधिक जंक फूड, शराब और नशीले पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही हरी सब्जियां, मौसमी फल, पर्याप्त मात्रा में पानी और संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, जिससे लिवर स्वस्थ रह सके।
डॉ. कमर ने कहा कि विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक बनाना, समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करना तथा इसके प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना है। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति जागरूक हो जाए तो हेपेटाइटिस के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।
