राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की सरस काव्य गोष्ठी सम्पन्न

vivratidarpan.com लखनऊ – लखनऊ  विधान भवन, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उ0प्र0 के तत्वावधान में ‘हिन्दी पखवारा’ के अन्तर्गत विशेष साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन मुख्य भवन, सचिवालय परिसर स्थित संस्थान के कार्यालय कक्ष-119ब, में किया गया, जिसमें अध्यक्षता डॉ0 शोभा दीक्षित ‘भावना’ ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं गज़लगो श्री प्रदीप सहाय ‘बेदार’ थे एवं बुंदेलखंड के ललितपुर से आई जी जी आई सी की प्रिंसिपल से०नि० अति विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती सूर्यमुखी स्वर्णकार उपस्थित थीं एवं विशिष्ट अतिथि श्रीमती रश्मि ‘शरद’ जी थीं। कार्यक्रम का सफल संयोजन श्रीमती पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव जी ने किया। गोष्ठी का कुशल संचालन डॉ0 उमेश ‘आदित्य’ एवं श्री चन्द्रदेव दीक्षित ‘चन्द्र’ ने किया।
कार्यक्रम का आरम्भ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके पश्चात संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ0 उमेश ‘आदित्य’ द्वारा वाणी वन्दना प्रस्तुत की गई। गोष्ठी में अधोलिखित साहित्यकारों ने अपने गीत, गज़ल, छंद, मुक्तक से सभी को भाव विभोर कर दिया:-
मुख्य काव्यांश –
डॉ0 शोभा दीक्षित ‘भावना’ – जमाने भर की रुसवाई मिली है, मोहब्बत में यह सच्चाई मिली है।
श्री प्रदीप सहाय ‘बेदार’ – थक गया लड़कर सभी से, कुछ नहीं, जब कर सका। उसने फिर यूँ कर दिया, बेटी को शिक्षित कर दिया।
श्रीमती सूर्यमुखी स्वर्णकार मेरे छोटे से भगवान मेरे मोटे से भगवान
श्रीमती रश्मि ‘शरद’ – राम और राम के बीच का द्वंद्व था, राम से राम हारा, तुम्हें जानकी।
डॉ0 सीमा गुप्ता – आज इज़हार कर लिया मैंने, आपसे प्यार कर लिया मैंने।
डॉ0 हरी प्रकाश ‘हरि’ – काल हूँ, कराल हूँ, मैं काल हूँ, विकराल हूँ।
डॉ0 उमेश ‘आदित्य’ – काले घन मंडराने वाले, वर्षा बनकर आने वाले।
श्री चन्द्रदेव दीक्षित ‘चन्द्र’ – साया बनकर साथ चलेंगे, इसके भरोसे मत रहना, अपने हमेशा अपने रहंेगे, इसके भरोसे मत रहना।
श्रीमती रेनू वर्मा ‘रेणु’ – यूँ ही बेवजह मुस्कुराना, अब हमसे नहीं होगा।
श्री अमरेन्द्र कुमार द्विवेदी – तेरी आँखों में खो जाने की हसरत आज जागी है।
श्रीमती मीना गौतम – ‘माँ और बेटी’ शीर्षक पर कविता पढ़ी।
श्रीमती पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव – सावन को आज बरसने दो।
श्री रामराज भारती – सज्जनों के साथ मीठे दो बोल जिंदगी है।
श्री गौरव मिश्र – ‘जीवन की पतंग’ शीर्षक कविता सुनाई और अपने पिता को समर्पित अपने पिता की कविता पढ़ी।
इन सभी साहित्यकारों के अतिरिक्त श्रीमती अलका अस्थाना, श्रीमती शशि प्रभा, श्रीमती अलका शर्मा एवं श्रीमती अनीता चौधरी ने भी अपना काव्यपाठ प्रस्तुत किया। सभी आगन्तुक साहित्यकारों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 हरी प्रकाश ‘हरि’ ने किया।
भवदीय – (डॉ0 सीमा गुप्ता) महामंत्री , सम्पादक,  लखनऊ।

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