मेरे ख्यालात – डॉ. प्रियंका सौरभ

समय बदलता जा रहा, बदल रहा संसार।
जो चलता बदलाव सँग, करता नैया पार॥

बदलावों से डर भला, कब तक मन में पाल।
नव अवसर की राह में, रख साहस की ढाल॥

कल जैसा था आज जो, वैसा रहे न रूप।
परिवर्तन के रंग से, जीवन बने अनूप॥

सोच बदलकर देखिए, बदलेगा व्यवहार।
मन में यदि सद्भाव हो, मधुर बने संसार॥

सीख पुराने से लिए, नूतन गढ़िए राह।
परिवर्तन ही दे सके, जीवन को उत्साह॥

जड़ता मन की रोकती, आगे बढ़ते पाँव।
बदलावों को जो चुने, उसके बढ़ते गाँव॥

परिवर्तन यदि नेक हो, जग में लाए मान।
नव निर्माण की राह पर, बढ़ता है इंसान॥

विचार नये जहाँ सदा, कर्मों में विश्वास।
बदलावों के संग मिले, जीवन को आकाश॥

समय सिखाता है हमें, बदलो अपनी चाल।
जो मौसम के संग चले, खिलता उसका भाल॥

रिश्तों में जब प्रेम हो, मिट जाता हर भेद।
मीठे बोलो बदल दें, मन का सारा खेद॥

हेरफेर और’ छल-कपट, परिवर्तन मत जान।
स्वार्थ वश जो हो करे, खोता अपना मान॥

सच्चा परिवर्तन वही, जिसमें हो उत्थान।
अपने संग समाज का, बढ़े सदा कल्याण॥

बीते कल को भूलकर, मत करे पश्चताप।
आशा मन में रख बढ़ो, खिलता नव प्रभात॥

बदलावों की आँधियाँ, देतीं नया संदेश।
हिम्मत वाला ही रचे, जीवन का परिवेश॥

परिवर्तन से ही सदा, आगे बढ़ता काल।
रुका हुआ जो हो गया, वो रहता बेहाल॥

तन बदले या मन बदल, बदले जग व्यवहार।
अच्छे परिवर्तन से मिले, जीवन को सत्कार॥

नूतनता में है छिपा, उन्नति का आधार।
बदलावों को अपनाइये, करिए नव निर्माण॥

कल की गलती से सदा, सीखो नया विधान।
सुधर गया जो आज में, उसका उज्ज्वल मान॥

परिवर्तन की राह में, धीरज रखना मित्र।
धीरे-धीरे खिल उठे, जीवन का हर चित्र॥

बदलावों का मूल है, सोच और व्यवहार।
मन बदले तो बदलता, पूरा यह संसार॥
-डॉ. प्रियंका सौरभ, उब्बा भवन, आर्यनगर,
हिसार (हरियाणा) – 125005, मोबाइल: 7015375570

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