नंद घर आनंद भयो,
बजी बधाई द्वार।
कारागार में जन्म लियो,
कंस का करने संहार।
यशोदा की गोद में सोये,
नटखट नंदकिशोर।
माखन मिश्री चुराए,
मुख पर माखन का भोर।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे,
हाथ में मुरली प्यारी।
जिसकी धुन पर नाचे,
ये दुनिया सारी।
आया जन्माष्टमी का पावन त्यौहार।
– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना, बिहार
