स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के हस्तक्षेप के बाद फार्मासिस्टों ने अपना काला फीता आंदोलन 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है। सचिवालय में स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में फार्मासिस्टों की पांच सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई। शासन स्तर से मांगों पर कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद फार्मासिस्ट संघ ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।
सुभाष चंद्र बोस सभागार में हुई बैठक में स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय, वित्त सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव स्वास्थ्य रोहित मीणा, महानिदेशक चिकित्सा डा. सुनीता टम्टा समेत शासन और महानिदेशालय के अधिकारी मौजूद रहे। फार्मासिस्ट संघ की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सुधा कुकरेती, महामंत्री डॉ. सतीश चंद्र पांडेय समेत पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में दस वर्ष की सेवा पूरी करने वाले फार्मासिस्टों को पदोन्नत पद का वेतनमान देने की मांग पर डिप्लोमा इंजीनियर्स की तर्ज पर उपसमिति को प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी। वहीं स्वास्थ्य उपकेंद्रों में पूर्व से सृजित फार्मासिस्ट पदों को राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजने का निर्णय लिया गया।
फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 को प्रदेश में लागू करने के लिए महानिदेशालय से तत्काल प्रस्ताव शासन को भेजने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और असम की तर्ज पर फार्मासिस्टों को औषधियों के अधिकार देने की मांग पर महानिदेशालय की समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को देने के निर्देश दिए गए।
चारधाम यात्रा ड्यूटी के लंबित देयकों के भुगतान को लेकर भी कार्रवाई का भरोसा दिया गया। इसके लिए महानिदेशालय स्तर से मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से तत्काल बजट की मांग मंगाई जाएगी। यात्रा ड्यूटी के दौरान कार्मिकों के रहने और भोजन की उचित व्यवस्था के संबंध में संबंधित जिलों से भी रिपोर्ट मांगी जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद फार्मासिस्ट संघ की उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने आंदोलन को 15 दिन के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि बैठक का कार्यवृत्त जारी होने और संबंधित पत्रावलियों के आगे बढ़ने तक आंदोलन स्थगित रहेगा। यदि इस अवधि में मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।
