हे मां ब्रह्मचारिणी – सविता सिंह

चहुं ओर बिखरती पावन हरसिंगार की महक,

हे माँ! जगत में गूंज उठी तेरे आगमन की दस्तक।

नवरात्रि के पावन पर्व का है यह दूसरा दिन,

हे माँ ब्रह्मचारिणी! हम तुच्छ हैं तुम्हारे बिन।

एक कर में जप की माला, दूजे हस्त कमंडल,

श्वेत वस्त्र धारिणी माँ का, दिव्य दीप्त मुख-मंडल।

हिमालय-सुता तपस्विनी, तुमने किया तप घोर,

तप के बल से ही पाया, शिव शंकर सा वर सिरमौर।

तेरी कठिन तपस्या का, बस एक यही संदेश है,

अडिग रहे यदि प्रण मन का, तो निश्चित ही जय शेष है।

माँ तेरे दिव्य आगमन से,अंतर्मन हुआ परम प्रसन्न,

रोली, अक्षत, धूप, कपूर, श्रद्धा भाव से करती हूँ अर्पण।

श्वेत वस्त्र धारिणी हे माँ,  परम तपस्विनी कल्याणमयी

हम तेरे हैं संतान तू है  सबकी माँ ममतामयी।

-सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

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