नगर कानपुर गंग किनारे, श्री जागेश्वर धाम है।
रंग बदलते शिव विग्रह का, दूर-दूर तक नाम है।
किवदंती कहती ब्रह्मा ने, स्थापित कर यज्ञ किया था,
श्रद्धा से दर्शन जो करता, उसका बनता काम है।
(श्री आनंदेश्वर जी, कानपुर) –
गंगा तट पर बना हुआ है, मन्दिर श्री आनंदेश्वर का।
सदियों पहले गौ ने खोजा, विग्रह शिव परमेश्वर का।
आनंदी गैया आ कर नित, अपना दूध चढ़ाती थी,
हर श्रावण में भक्त लगाते, जयकारा चन्द्रेश्वर का।
(श्री गौरीशंकर जी, कानपुर) –
वर्ष आठ सौ पहले शिव को, सैनिक ने था याद किया।
स्वस्थ हुआ मन्दिर बनवाऊँ, ऐसा उसने वचन दिया।
भव्य गेह उसने बनवाया, गौरीशंकर के वर से,
पूर्ण कामना उसकी होती, जिसने भी संकल्प लिया।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
