vivratidarpan.com देवबंद — उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर देवबंद में लेखपालों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर संघ के अध्यक्ष कन्हैयालाल के नेतृत्व में आठ सूत्रीय ज्ञापन उप जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। ज्ञापन में लेखपालों की वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान किए जाने तथा उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई। संघ ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 17 अक्टूबर 2026 से संपूर्ण कार्य बहिष्कार करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
लेखपाल संघ का कहना है कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की आधारशिला के रूप में कार्य करते हैं। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने, किसान हित से जुड़े कार्यों, राजस्व अभिलेखों के रखरखाव, विरासत एवं नामांतरण, पैमाइश, आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों का दायित्व लेखपालों पर रहता है। इसके बावजूद लेखपाल लगातार बढ़ते कार्यभार, पर्याप्त संसाधनों के अभाव, लंबित पदोन्नति, वेतन विसंगतियों, अतिरिक्त कार्यभार तथा अवकाश के दिनों में भी ड्यूटी लगाए जाने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
ज्ञापन में संघ ने कहा कि लेखपालों की कई मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। इनमें प्रारंभिक वेतनमान में 2800 रुपये ग्रेड-पे की मांग एवं वेतन विसंगति दूर करने का मुद्दा करीब दस वर्षों से लंबित बताया गया है। इसी प्रकार अंतरमंडलीय स्थानांतरण की मांग भी लगभग आठ वर्षों से लंबित होने की बात कही गई है।
संघ ने वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची जारी कर समय से डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) कराने, वर्ष 2024 की विभागीय परीक्षा का परिणाम घोषित करने, स्थायीकरण में हो रहे विलंब को दूर करने तथा लेखपालों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों में वृद्धि किए जाने की मांग भी उठाई। संघ के अनुसार भत्तों में वृद्धि का मामला भी लंबे समय से लंबित है।
लेखपाल संघ ने शासन से मांग की कि उनकी सभी लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र शासनादेश जारी किए जाएं, ताकि लेखपालों को कार्य करने के लिए बेहतर परिस्थितियां और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि लेखपाल लगातार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय से समस्याओं का समाधान न होने के कारण उनमें असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 17 अक्टूबर 2026 से प्रदेशव्यापी स्तर पर संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि आंदोलन के दौरान प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होने अथवा जनमानस को होने वाली असुविधा के लिए राजस्व परिषद एवं शासन जिम्मेदार होगा, क्योंकि संघ का कहना है कि मांगों के समाधान के लिए उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस दौरान लेखपाल संघ के अध्यक्ष कन्हैयालाल, मंत्री अरुण कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूपेंद्र, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सूरज, उपसचिव अमित गुप्ता, कोषाध्यक्ष शिवकुमार, लेखा निरीक्षक नीलेश कुमार सहित बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे।
रिपोर्टर — महताब आज़ाद
