भाई बहनों का प्यारा, रक्षाबंधन दुलारा,
प्रेम के धागों में बसा, आपस का प्यार है।
रोचना लगाए भाल, भाई भी होता निहाल,
प्रीति की अनोखी भाषा, मानता संसार है।
रक्षा का वचन देता, भाई भी बलैयां लेता,
सीना आगे कर देता, झेले हर वार है।
बंधन ये प्रीति भरा, कभी नहीं देता दगा,
साल दर साल चले, प्यारा सा त्योहार है।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
