अवसर मिले मैं यहाँ का कानून बदल दूँ ।
सर पर चढ़ा ये रिश्वत का जुनून बदल दूँ ।
जिससे हुआ है पैदा जाति धर्म का ये भेद,
मैं रगों में बहता हुआ वह खून बदल दूँ।
समय की तपन में खो चुका जो सौंदर्य
परिवर्तन की डाली का वह प्रसून बदल दूं।
सत्ता में आकर कर रहे जो देश को छलनी
राजनीति के वो विषभरे नाखून कुचल दूँ।
-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश
