प्रकृति के साथ व्यापक अस्तित्व को जानना जरूरी – आचार्य नवीन

vivratidarpan.com गयाजी ( डॉ अनमोल कुमार ) । योग एवं जीवन विद्या परिचय सत्र में बिहार ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष एवं अधिकारियों की सहभागिता
योग का अर्थ शरीर और जीवन को संयुक्त रूप में समझने के साथ प्रकृति एवं व्यापक के सह-अस्तित्व को जानना है : आचार्य नवीन।
गया जी, 31 अक्टूबर। आज प्रातः 6 बजे मानव अध्ययन केंद्र, अष्टांग योग संस्थान, रेड क्रॉस सोसायटी, गया जी (बिहार) में आयोजित ‘योग एवं जीवन विद्या’ परिचय सत्र में बिहार ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष श्री मुकुल सहाय जी एवं ग्रामीण बैंक, गया जी के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री विकास कुमार जी ने सभी बैंक मैनेजरों के साथ सहभागिता की।
इस अवसर पर मध्यस्थ दर्शन सह-अस्तित्ववाद के अध्येता आचार्य नवीन जी ने योग के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि योग का अर्थ सबसे पहले शरीर और जीवन को संयुक्त रूप में समझना है। जीवन के अंतर्गत मन, वृत्ति, चित्त, बुद्धि एवं आत्मा का अध्ययन आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि योग की पूर्णता केवल शरीर एवं जीवन को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और व्यापक के सह-अस्तित्व को समझना ही योग का अंतिम एवं व्यापक अर्थ है।
इस परिचय सत्र में बैंक के अधिकारियों ने योग एवं जीवन विद्या के माध्यम से स्वस्थ शरीर, संतुलित जीवन, मानवीय मूल्यों तथा समाधानपूर्ण जीवन जीने के आधारों को समझने में रुचि दिखाई।
कार्यक्रम में बिहार ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष, क्षेत्रीय प्रबंधक एवं सभी बैंक मैनेजरों की सहभागिता के लिए मानव अध्ययन केंद्र की ओर से हार्दिक स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया।

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