दिल तोड़ दिया तूने मगर तेरा प्यार जिंदा रखा है।
छुपाके मासूम हुस्न को दिल में जैसे परिंदा रखा है।
मेरे आह की परवाह किया ही नहीं तूने यार कभी ।
तेरे इश्क में पागल आशिक बनाके कारिन्दा रखा है।
अपने मर्जी का मालिक है तू गुरूर हुस्न कम नहीं ।
तुझे पा न सका ग़म इस बात खुद को शर्मिंदा रखा है।
तू जहां भी रहेगा मेरी याद तुझे तड़पाएगी बहुत।
पत्थर दिल मुझ मासूम दे तन्हाई का दरिंदा रखा है।
मदहोश है तू खुद के लबालबाते दरिया ए हुस्न पर।
कोई हो मिसाल दूं तेरा हुस्न भारती आइंदा रखा है।
-श्याम कुंवर भारती, बोकारो,झारखंड
