मँय तोर बेटा अँव दाई, तँय ह मोर महतारी ओ।
तोला सुमरत आवत हँव, मँय ह तोर दुवारी ओ।।
थारी म धरे हँव तोर बर, नरियर, फूल अउ चुनरी।
महमहई उदबाती बारके, उतारत हँव तोर आरती।।
मोर दुख ल हरले माता, मोर बिगड़े काम बना दे।
अरजी, बिनती करत हँव, जिनगी म खुशी ला दे।।
घंटी बजाके तोला जगाहूँ, ए दरी कर दे उपकार।
सबके सुनथच, मोर गरीब के सुन ले माता पुकार।।
घर म सुख अउ शांति लादे, समृद्धि के भर दे भंडार।
नौ दिन ले सेवा करत हँव, तोर महिमा हे अपरंपार।।
तोर मंदिर मेर किंदरत हवँव, जपत-जपत तोर नांव।
जनम देवइया तहीं माता, तोला छोड़के कहाँ जांव।।
हे! शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा माता।
चेतना, ज्ञान, साहस अउ शक्ति ले हवय तोर नाता।।
हे! स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी देवी।
करुणा, विजय, भय, क्षमा रुप, मँय तोर दास सेवी।।
भक्ति करे ले मिलथे शक्ति, नवदुर्गा के करथैं गुनगान।
हे! सिद्धिदात्री माता रानी, सफलता के देदे वरदान।।
– अशोक कुमार यादव, मुंगेली, छत्तीसगढ़
