जून का महीना – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

जून का महीना आया है,

तपता सूरज छाया है।

धरती तपती अंगारों सी,

गरम हवा का साया है।

पेड़ खड़े हैं मौन थके से,

पंछी ढूँढ़ें ठंडी छाँव।

नदियाँ भी कुछ सूनी-सूनी,

मन को सताए गर्मी का दाँव।

आमों की खुशबू बिखर रही,

बागों में रौनक छाई है।

बादल की राह निहार रही,

धरती ने आस लगाई है।

कभी-कभी पुरवाई चलती,

मन को थोड़ा हरषाती है।

बरखा रानी के आने की,

मीठी खबर सुनाती है।

जून सिखाता धैर्य हमें,

हर मौसम का मान करो।

कठिन तपन के बाद ही देखो,

सावन का स्वागत करो।

– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

जगदलपुर राजिम , छत्तीसगढ़

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