ग्यारह अक्टूबर से प्रारंभ होंगे शारदीय नवरात्र – आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज

vivratidarpan.com रुड़की – ग्यारह अक्टूबर से प्रारंभ होंगे शारदीय नवरात्र, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, उच्च के बृहस्पति धार्मिक वातावरण ज्यादा बनेगा,बृहस्पति सूर्य के सहयोग से बहुत अच्छा योग बनता है, 58 वर्ष बाद बन रहा विशेष गजकेसरी योग,ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से बढ़ेगा नवरात्रि का ज्योतिषीय महत्व, आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज
ज्योतिष गुरुकुलम नवग्रह पीठ के संस्थापक अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने बताया कि इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के साथ प्रारंभ होने जा रहा है।शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार 11 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगा।इस वर्ष नवरात्रि के प्रारंभ होने का विशेष महत्व इसलिए भी है,क्योंकि रविवार से नवरात्रि आरंभ होने की धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर पृथ्वी पर आगमन करेंगी।धार्मिक परंपरा में हाथी को सुख-समृद्धि, स्थिरता,अच्छी वर्षा और संपन्नता का प्रतीक माना गया है।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने बताया कि इस बार नवरात्रि के प्रथम दिन गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति से गजकेसरी योग,जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग 58 वर्ष बाद बनने वाला दुर्लभ संयोग है,साथ ही शनि से संबंधित राजयोग सूर्य,बुध का राज योग शुक्र,बुध का लक्ष्मी नारायण योग,ऐश बुद्ध आदित्य योग।कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं,बल्कि शक्ति,साधना,आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का महापर्व है।इन नौ स्वरूपों की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति,संयम और सद्भाव का संकल्प ले सकते हैं।शारदीय नवरात्रि 2026 की प्रमुख तिथियां बताते हुए कहा कि आगामी 11 अक्टूबर,रविवार-प्रतिपदा,मां शैलपुत्री की पूजा एवं घटस्थापना,12 अक्टूबर,सोमवार-द्वितीया,मां ब्रह्मचारिणी की आराधना,13 अक्टूबर,मंगलवार-तृतीया,मां चंद्रघंटा की पूजा,14 अक्टूबर,बुधवार-चतुर्थी,मां कूष्मांडा की आराधना,15 अक्टूबर,गुरुवार-पंचमी
मां स्कंदमाता की पूजा,16 अक्टूबर, शुक्रवार,षष्ठी
मां कात्यायनी की आराधना,17 अक्टूबर,शनिवार-सप्तमी,मां कालरात्रि की विशेष आराधना,18 अक्टूबर,रविवार-सप्तमी तिथि जारी,विशेष पूजा-अर्चना एवं साधना का अवसर,19 अक्टूबर,सोमवार-अष्टमी एवं महानवमी
दोपहर के बाद नवमी तिथि प्रारंभ होने के कारण इस दिन अष्टमी तथा महानवमी की विशेष पूजा का संयोग रहेगा।20 अक्टूबर,मंगलवार-महानवमी एवं विजयादशमी
महानवमी तिथि के पश्चात विजयादशमी/दशहरा का पर्व मनाया जाएगा।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि नवरात्रि में श्रद्धालुओं को माता भगवती के नौ स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ,मंत्र-जप,हवन तथा कन्या पूजन करना चाहिए,साथ ही सात्विक आहार,संयम,सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को भी साधना का हिस्सा बनाना चाहिए।उन्होंने कहा कि मां दुर्गा का हाथी पर आगमन देश और समाज में सुख-शांति, समृद्धि,वर्षा एवं खुशहाली की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।नवरात्रि के इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालु मां भगवती की आराधना कर राष्ट्र,समाज और विश्व कल्याण की प्रार्थना करें।
रिपोर्टर — महताब आज़ाद

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