गुरुग्राम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव में जीवनधारा नमामि गंगे के डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ हुए सम्मानित 

vivratidarpan.com  गुरुग्राम (sudhir shreevastav)  – शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, खेल और पर्यावरण ,जलवायु संरक्षण इत्यादि में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभूतियों को ‘भारत साहित्य भूषण सम्मान’ और ‘भारत गौरव सम्मान’ से सम्मानित करने के उद्देश्य से पी.आई.यू. ट्रस्ट के तत्वावधान में 19 जुलाई 2026, रविवार को “तीसरा गुरुग्राम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का आयोजन गुरुग्राम, हरियाणा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ को उनके पर्यावरण जलवायु संरक्षण तथा साहित्यिक योगदान के लिए “भारत साहित्य भूषण सम्मान” से अलंकृत किया गया। डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ भारतोदय लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जीवनधारा नमामि गंगे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, काव्य रसिक संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री एवं पशुपतिनाथ अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव काठमांडू नेपाल के ब्रांड एम्बेसडर हैं, उन्हें स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रख्यात हरियाणा गौरव सुनील कुमार (प्रतिष्ठित कवि), जय प्रकाश नागपुर की उपस्थिति के साथ सभी प्रतिभागियों को मंच पर सम्मानित कर स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। कार्यक्रम में साहित्यकारों और समाजसेवियों के बीच परिचय, फोटोग्राफी, मीडिया कवरेज एवं नेटवर्किंग का अवसर भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संयोजन स्वाति वर्मा एवं मंच का संचालन उषा ने अपने बेहतरीन अंदाज में किया। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. सुरेश वर्मा ने उद्बोधन में कहा, “साहित्य समाज का दर्पण है। इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनकर प्रतिभाएं अपने योगदान को राष्ट्रीय मंच दे सकती हैं। इस कार्यक्रम में डॉ. राम रतन श्रीवास ‘राधे राधे’ के द्वारा उपस्थित सभी साहित्यकारों, एवं विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले प्रबुद्ध व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि पी आई यू ट्रस्ट, राहि फाउंडेशन एकेडमी, प्रियदर्शी IAS एकेडमी ने देश समाज और विद्यार्थियों को एक नई आयाम स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरित करता रहेगा । इस कार्यक्रम के माध्यांतर में भारतोदय लेखक संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन की आंतरिक बैठक संपन्न हुई जो सफल रहा इसी के साथ कार्यक्रम में शामिल सभी का अरविंद कुमार साहू (जी. एस. टी अधिकारी) के द्वारा आभार प्रकट करते हुए समापन की घोषणा की गई।

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