आपको देख कर सिहर जाते,
इतनी हो हूर हम ठहर जाते।
यार मुद्दत के बाद तुम आये,
तेरे बिन यार हम किधर जाते।
यार उल्फत हुई है अब तुमसे,
बिन तुम्हारे कही न मर जाते।
छोड़कर यार हमको जाना था,
टूट कर यार हम बिखर जाते।
तू रहे संग*ऋतु का अब होकर,
यार हँस कर खुशी से मर जाते।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
