आज मचले है धड़कन तुम्हारे लिये,
जान हाजिर हमेशा तुम्हारे लिए।
साज छेडो पिया तुम हमारे लिए,
इक तराना भी लिख दे तुम्हारे लिए।
आज सज कर चली आ रही चाँदनी,
चाँद से वो मिली है उजाले लिए।
प्यार तेरा हमे बस सताने लगा,
अश्क बहते रहे है तुम्हारे लिए।
आईना देख तुमको शरमाने लगा,
वो भी देगा गवाही हमारे लिए।
रात भर जागती ख्वाब देखूँ तेरा,
माँगती मैं दुआ यार तेरे लिए।
टूटते फिर रहे आज परिवार क्यो?
जी रहे लोग रिश्ते भी फीके लिए।
यार मेरा बड़ा खूबसूरत लगे,
रात दिन सोचती बस मैं उसके लिए।
जान देते हैं सरहद पे बैठे हुऐ,
अश्क बहते हमेशा उनके लिए।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
