जब बना लिया दुनिया को अपना अदावत किससे करे।
रहा न कोई दोस्त या दुश्मन फिर बगावत किससे करे।
चार दिन की जिंदगी चलो सबसे प्यार मेरे यार कर ले।
सब अपने जान औ समान की हिफाजत किससे करे।
सीधे साधे लोग और आपस में भाई चारा बहुत है यहां ।
न कोई चोर न बेईमान यहां फिर शराफत किससे करे।
बहती यहां दरिया दिली की नदिया जुबां है मीठी बड़ी।
लुटाते सभी दिल खोल के प्यार किफायत किससे करे।
सबकी नजरें पाक दिल भी गंगाजल निर्मल हो जैसा।
सभी है नाजुक दिल भारती फिर नजाकत किससे करे।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो ,झारखंड, मॉब.9955509286
