तुम्हारे बिना जिंदगी अधूरी – सुनील गुप्ता

  ( 1 )” तुम्हारे “, तुम्हारे बगैर है, जिंदगी अधूरी मेरी  ! तुम हो तो, है ये खूबसूरत…, वरना है ये, सूनी-सूनी कोरी  !! ( 2 )” बिना “,…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  मुहब्बत को दिल मे ठहरने तो दो, हुई प्यार पागल महकने तो दो।   सितारों को नभ मे चमकने तो दो, खुशी जो छिपी दिल उछलने तो दो।  …

कवि सुधीर श्रीवास्तव को मिला “हिन्दी साहित्य भारती सम्मान-2025”

  Vivratidarpan.com गोण्डा (उत्तर प्रदेश):-  जिले के वरिष्ठ कवि साहित्यकार देहदानी सुधीर श्रीवास्तव को साहित्य सेवा में अनुकरणीय योगदान हेतु ‘हिन्दी साहित्य भारती (ब्रज प्रांत) द्वारा “हिन्दी साहित्य भारती सम्मान-2025”…

मैं मजदूर हूं – हरी राम यादव

अलख सुबह निकल पड़ता हूं, मैं हाथ में लिए एक झोला। उसमें होती हैं कुछ सूखी रोटियां, और होता है आलू नमक का घोला ।   आस में खड़ा होता…

हे परशुराम, धर्म का दीप जलाओ – डॉ. सत्यवान सौरभ

जय जय परशुराम प्रभु, धरम के दीप जलाओ, अन्याय के घोर अंधेरे में, फिर से ज्योति जगाओ।।   कण-कण में करुण पुकार सुनाई, धरा पे फैली पीड़ा गहराई। अत्याचार की…

अँजोरा मिलेना – अनिरुद्ध कुमार

परेशान हरदम सहारा मिलेना, बड़ी दर्द होला किनारा मिलेना।   करेजा जराई जियेनी मरेनी, सबे ज्ञान देला दुबारा मिलेना।   जियेके जतन में हमेशा मरेनी, जहां जातबानी उबारा मिलेना।  …

मंडला की छंद साधिका योगिता चौरसिया वर्तिका काव्य शिखर अलंकरण से सम्मानित

Vivratidarpan.com जबलपुर – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रियाशील वर्तिका साहित्यिक, सांस्कृतिक ,समाजिक संस्था द्वारा  रानी दुर्गावती संग्रहालय कला वीथिका   सभागार जबलपुर में आयोजित भव्य समारोह में मंडला की कवयित्री ,छंद साधिका श्रीमती…

सास ससुर की याद में ‘विमला ज्ञान स्मृति सम्मान’

Vivratidarpan.com गोण्डा (उ.प्र):-  विमला ज्ञान साहित्य मंच द्वारा शिक्षा, कला, साहित्य, अध्यात्म और समाज सेवा के क्षेत्र में देश के विभिन्न अंचलों के 200 से अधिक लोगों को आनलाइन ‘विमला…

शब्दों से पहले चुप्पियाँ थीं – प्रियंका सौरभ

  शब्दों से पहले चुप्पियाँ थीं, सिलवटों में सिसकती बेटियाँ थीं। किताबों में दर्ज़ थीं उम्मीदें, मगर दीवारों में बंद इज़्ज़त की तिज़ोरियाँ थीं।   अजमेर की गलियों में कोई…

मोह दु:ख देता है – अंजू लता

  अपनों से अपनत्व रखें हम, संस्कार यही कहते हैं- मोह-माया के मोहक धागे, इसीलिये बांधे रखते हैं, राजा हो गया रंक कोई भी,जीव-जंतु,पशु-पाखी- जुड़ें परस्पर इसी मोह से जब…