चलो मन वृन्दावन की ओर – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) चलो रे मन, वृन्दावन की ओर ! चल मिल आएं श्रीराधे श्याम से खोलते मन द्वार…., श्रीजी के दर्शन पाएं !! चलो रे मन, वृन्दावन की…

गीत – जसवीर सिंह हलधर

  चार दिनों की जीवन लीला ,भिन्न भिन्न हैं राग अभय । कभी पूस की ठंड यहां पर ,कभी बसंती फाग अभय ।। कलियों से जो फूल बने वो ,क्यों…

ये रातें तुम्हें बुलातीं हैं – अनिल भारद्वाज

ख्वाबों की सजती बारातें तुम्हें बुलातीं हैं। बिना नींद वाली ये रातें तुम्हें बुलातीं हैं। अमलतास के संग पलाश ने पथ में स्वागत द्वार बनाए, अमराई ने नये बौर से…

गीत – मधु शुक्ला

चलो अयोध्या धाम जहाँ पर, पावन सरयू‌ बहती है। मर्यादा पुरुषोत्तम जी की , जीवन गाथा कहती है।   एक पुत्र के कर्तव्यों से , धरा अयोध्या मिलवाती। श्रेष्ठ सभी…

कोचिंग इंडस्ट्री की मनमानी: अभिभावकों और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ – प्रियंका सौरभ

हिसार – हिसार स्थित ALLEN Career Institute पर अभिभावकों ने आरोप लगाए हैं कि संस्थान ने उनके बच्चों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद कर दिया और अब जबरन फीस वसूली…

‘यमराज मेरा यार’ -एक अनूठा हास्य-व्यंग्य काव्य संग्रह – डॉ पूर्णिमा पाण्डेय

Vivratidarpan.com – सरल, सहज बहुमुखी प्रतिभा के धनी कवि साहित्यकार डॉ सुधीर श्रीवास्तव का हास्य व्यंग्य काव्य संग्रह ‘यमराज मेरा यार’ की समीक्षा करने का सौभाग्य मिला। संग्रह का शीर्षक…

पश्चिम बंगाल में केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी चिंताजनक – शिवशरण त्रिपाठी

Vivratidarpan.com – एक बार पुन: पश्चिम बंगाल जल रहा है। हिंसा, आगजनी की नई इबारतें लिखी जा रही है और यह कहर ढाया जा रहा है हिन्दुओं पर वक्फ  संशोधन…

होगा यहीं खुलासा (दिग्पाल छंद) – अनिरुद्ध कुमार

माहौल देखतें है, होता यहाँ तमाशा। बेचैन हो निहारें, जागे सदा हताशा।। बैरी लगे जमाना, बेबात रोज नारा। सूझे नहीं किनारा,  कोई नहीं सहारा।।   कैसा नया जमाना, हालात क्या…

रायबरेली में अन्तर्राष्ट्रीय काव्य महाकुंभ 26 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा

Vivratidarpan.com गोण्डा/रायबरेली- : अल्प समय में अपनी साहित्यिक गतिविधियों और देश/ विदेश के कलमकारों को एक मंच पर लाकर चर्चा के केंद्र में आ चुका साहित्यिक संगठन ‘रायबरेली काव्य रस…

मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं? – डॉ. सत्यवान सौरभ

Vivratidarpan.com – “धोखे की खबरें बिकती हैं, लेकिन विश्वास की कहानियाँ दबा दी जाती हैं — क्या हम संतुलन भूल गए हैं?” मीडिया में स्त्रियों की छवि और उससे जुड़ी…