लूट सके तो लूट ले – सुनील गुप्ता

( 1 ) लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ! अंत समय पछताएगा.., जब प्राण जाएंगे छूट !! ( 2 ) छूट सके भव सागर से, ऐसे…

कैसे लोग हैं ये – गुरुदीन आज़ाद

  कैसे लोग हैं ये, समझ लेते हैं हर किसी को, अपना मालिक ये लोग।   कम से कम इन्होंने, यह तो देखा होता, कि कितना उज्ज्वल है, वह कितना…

फिर आयेगा गौरी – डॉ. सत्यवान सौरभ

  खून में उबाल हो, जुबां में ज्वाल हो, फिर क्यों हर बार समझौता, हर बार सवाल हो? यह वक़्त है ललकारने का, न कि मौन में घुलने का, इतिहास…

गीत (राम दरबार) – श्याम कुंवर भारती

  अयोध्या में आज राम दरबार सजा है। श्रीराम संग सिया का श्रृंगार सजा है।   भाई भरत लक्ष्मण शत्रुघ्न साथ में है बिराजे । महाबली हनुमान बैठे है गदा…

ॐ हनुमते नमः – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  दिवस बजरंग का, भावमय उमंग का, भक्ति रस तरंग का, अहसास कीजिये।   पर्व यह मना रहे, ध्यान मन लगा रहे, छवि हिय सदा रहे, आशीर्वाद दीजिये।   चालीसा…

ख़ुदा का नेक इंसान – प्रकाश राय

इम्तिहान से मुसलमान, अपनी नेकी कर्म से महान। ख़ुदा का फ़रिश्ते, सब्र से रहा करते। किसी से कुछ नहीं कहा करते, अपनों से कभी नहीं रूठा करते। वजूद है हमारी,…

व्यक्त कर पाए – ज्योत्सना जोशी

  यदि मैं ख़ोज पाऊं उन शब्दों को जो मौन को वर्णित कर पाए हूक पहले पहर उठी थी उस तड़प को बता जाए पंखुड़ियों के मध्य पसरी तुषार की…

ये जीवन साकार करें – अनिरुद्ध कुमार

  अब ना कोई याद करें, सोचें पल बरबाद करें. ख्यालों में मूरत तेरी, दिल में हीं संवाद करें।   याद दर्द आबाद करें, हर पल हीं बेताब करें। ऐसे…

कौन जात हो तुम, भारत जेन? (व्यंग्य नाटक) – विवेक रंजन श्रीवास्तव 

vivratidarpan.com – मंच – एक सरकारी स्कूल का फुर्सतिया कमरा। कुर्सी पर बैठे हैं जनगणना प्रभारी मास्साब। सामने लैपटॉप की स्क्रीन पर चमक रहा है ‘भारतजेन’। मास्साब (गंभीरता से): नाम बताओ।…

बेटियां – रेखा मित्तल

बदलते किरदार जैसे-जैसे बड़ी हो रही हूँ सब किरदार बदल रहे हैं जिन नन्हें हाथों को पकड़ कर चलना सिखाया अब वह मुझे दिशा दिखा रहे हैं फर्क बस इतना…