बाबागिरी का धंधा कभी न हो मंदा (व्यंग्य)  – सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – देश में बेरोज़गारी एक विकट समस्या है। इस समस्या को मुद्दा बनाकर सरकारें बदल दी जाती हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है। मजबूरी में बेरोज़गार…

सिंदूरी प्रतिशोध – अरुण जैन

अभिनन्दन भारत की सेना आज तुम्हारा, बनके काल दुश्मनों को तुमने जो मारा। पहलगाम में निर्दोषों का खून बहाया, छब्बीस बहिनों का उसने सिन्दूर उजाड़ा। किया अनाथ शतादिक भारत वालों…

पनपे जख़्म हजार – डॉ.सत्यवान सौरभ

रिश्ते यूँ ना टूटते, होते नहीं अधीर। धीरे-धीरे चुप रहें, सहते- सहते पीर॥   अनदेखी जब भाव की, होती बारंबार। मन में फिर चुपचाप से, पनपे जख़्म हजार॥   शब्दों…

वीर जवानों को नमन – प्रियंका सौरभ

चली हवा संग तिरंगा, गूँजे रण का शोर, सरहद पर बैठे सपूत, आँखों में है जोर। धरती माँ का व्रत लिया, रखेंगे सम्मान, नमन तुम्हें हे वीर सपूतों, भारत की…

बदला – अंजू लता

प्रतिस्पर्धा, प्रतियोगिता  दोनों में है भेद- एक बहाती रक्त है, दूजी श्रम का स्वेद, धोखा देकर  वार करे, शत्रु नीच वह होय- निर्दोषों को मारकर नहीं जतावे  खेद.   बदला…

श्री हनुमंत प्रकाश- सुंदर काण्ड का नवोन्मेषी स्वरूप

Vivratidarpan.com – लोक कल्याण की भावना और उद्देश्य से प्रस्तुत पुस्तिका का एक मात्र उद्देश्य श्री बजरंग बली जी महाराज से जन-जन के कल्याण हेतु निवेदन करना है। जिसे पुस्तिका…

नये भारत में गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की प्रासंगिकता – इंजी. अतिवीर जैन”पराग”

Vivratidarpan.com – रविंद्रनाथ टैगोर को आज भी भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में एक महान कवि, उपन्यासकार ,कथाकार, नाटककार, संगीतकार और चित्रकार के रूप में याद किया जाता है…

और माँ चली गयी – राधा शैलेन्द्र

  टूट गया विश्वास मेरा भ्रम सभी जाता रहा माँ कभी मर नही सकती मुट्ठी से फ़िसलती रेत की तरह माँ चली गयी दूर, बहुत दूर मुझसे!   जानती हूँ…

अब तो ललकारो – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) वीर बहादुर ओ सैनिकों, अब उठो जागो और ललकारो  ! जाओ भेद डालो दुश्मन की छाती.., सीधे घर में घुसकर, उनको मारो !!   ( 2…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  प्यार का गीत मिलकर सुनाएं चलो, दर्द दिल का सदा हम भुलाएं चलो।   ख्याब आँखो मे तुम अब सजाएं चलो, जश्र सब जन्मदिन का मनाएं चलो।   यार…