आराधिका साहित्यिक मंच की जन्मदिन विशेष काव्य गोष्ठी

vivratidarpan.com – आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) द्वारा देव निर्माल्य साहित्यिक संस्थान के संस्थापक अधिवक्ता/कवि डा. राजीव रंजन मिश्र के जन्मदिन (15 मई) के तत्वावधान में ’17 मई’ 2025 को भव्य…

अंकों के परे, जीवन की असल पहचान – प्रियंका सौरभ

  अंकों के बंधन में क्यों, जीवन को ललचाया जाए? क्या बच्चे की असली पहचान, केवल अंकों से तय किया जाए? क्या उसकी आत्मा, उसकी धड़कन, उसकी संवेदनाएँ, क्या इन…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

देश के ध्वज का हमेशा मान होना चाहिए । राष्ट्र गरिमा का सभी को भान होना चाहिए । रात दिन जो सरहदों को सींचते हैं खून से , उन शहीदों…

ऐसा भी नहीं कि – ज्योत्सना जोशी

सोचा था तन्हा रहने का शऊर आ जाए, सोचा था तुमसे बिछड़े तो सब्र आ जाए, तुमको जानने के बाबत शायद, खुद तक पहुंचने की राह मिल जाए। कहा तो…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  इबादत जिंदगी का पासबाँ है, फँसे संकट निकलने की दुआ है।   मिले हमको बिसाले यार तुम क्यो? लगे किस्मत ने हमको अब छला है।   जरा छोड़ो हमारी…

क़दमों के नीचे – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) क़दमों के नीचे अपने, हरेक पल दबता चला गया इंसान   ! और होता गया वो दिनों-दिन नित बड़ा…, पर, कम न हुई वुसअ’तें ज़ुल्मों की कभी…

दो बिम्ब… माँ अँधेरे कोने में… – इंजी. अरुण कुमार जैन

  आज मदर डे है..! मना रहे हैं एक -एक, दो-दो बच्चे, जिनकी माँ बड़े दुलार से, अपने बच्चों को पीजा, मैकरोनी या जमैटो का खाना खिलाती हैं, छोड़ मोबाइल,…

सौरभ छंद सरोवर- काव्यमय जीवन दर्शन

vivratidarpan.com – सुनीता सिंह सरोवर द्वारा रचित प्रस्तुत संग्रह ‘धराधाम’ इंटरनेशनल के प्रमुख सौहार्द शिरोमणि संत डा. सौरभ एवं उनकी धर्मपत्नी डा. रागिनी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है।…

मेहमान – डॉ सत्यवान सौरभ

  पाँच की मैगी साठ में खरीदी, सौदा भी कोई सौदा था? खच्चर की पीठ पे दो हज़ार फेंके, इंसानियत भी कोई इरादा था?   बीस के पराठे पर दो…

बेसुरा वक्त है – अनिरुद्ध कुमार

  देख आतंक लगता बुरा वक्त है लगरहा नफरतों से भरा वक्त है   आदमी इसकदर बेरहम बेवफा मतलबी आंधियोंका हरा वक्त है   रो रही जिंदगी जलरहा है जहाँ…