आकाश गंगा की कहानी – जनक वेद

vivratidarpan.com –  प्रतिदिन रात को सोने से पहले, अपनी गुणवान मां से, नक्षत्रों के विषय मेें जानकारी मिलती। हमारी मां उस ज्ञान को, इतने सुंदर व रोचक रूप से सुनाती…

चाय – अनिरुद्ध कुमार

  चाय बिना सब कुछ है फींका। इसनें सबका दिल है जीता।। चाय बना जीवन जन-जन का। औषधि लगता है तन-मन का।।   आशिक इसके बहुत दिलेरे। चाय जहाँ प्याली…

भाव फिर बुद्ध आवा (भोजपुरी) – श्याम कुंवर भारती

  युद्ध औरी शांति कबों चले ना दुनु एक साथ। पीठ पीछे करे बुराई औरी मिलावे कपटी हाथ।   क्षमा शांति औरी ज्ञान शोभेला वीर बलवाना। मुरख मूढ़ औरी अज्ञानी…

ॐ हनुमते नमः – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

अंजनी के पुत्र धीर बजरंगी महावीर, ध्यान लगा राम में वे नाम ही जपा करें।   आंजनेय भक्त बड़े सेवा हेतु सदा खड़े, रामकाज सदा बने यत्न ये किया करें।…

प्रीत की रीत – सविता सिंह

वो दो ऑंखें तुम्हारी पीठ पर ही जमी हुई। हो गई है एक सदी पीठ के बल सोई नहीं। यूँ ही करवट सोते हुये बीत गया जमाना, ना जाने उन…

बुद्ध की पाती – सुनील गुप्ता

  मुझे मिली एक दिवस, बुद्ध की पाती…., और पढ़के आनंद से, आत्मविभोर हो गया !!1!!   मुझे पता नहीं था, कि, बहे अंतस झरना…, और स्वयं से मिलके, तरबतर…

डिजिटल समय में स्त्री पुरूष समानता – इंजी विवेक रंजन श्रीवास्तव

vivratidarpan.com –  17 मई 1865 को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना की गई थी । जिसकी स्मृति में प्रति वर्ष 17 मई को विश्व दूरसंचार दिवस के रूप मे मनाया…

ग़ज़ल – विनोद निराश

  वो किसी की आँख का नूर हो गया, कल था पास मेरे आज दूर हो गया।   नसीब तो इतना बुरा न था मगर, मुफलिसी का मेरी कसूर हो…

नमक मिर्च के तड़के वाली अभिव्यक्ति (व्यंग्य) –  सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – रहिमन देखिन बड़ेन को लघु न दीजिए डारि, जहाँ काम आवे सुईं काह करै तलवारि।, रहीम दास जी ने व्यावहारिक दोहा रचकर संसार को सीख दी, कि औजारों…

सबसे बड़ा है कौन (व्यंग्य) –  डॉ. हरीशकुमार सिंह

vivratidarpan.com – सत्ता ,संगठन और राजनेता राजनीति की मुख्य धुरी हैं। कहा जाता है कि अगर इनमें तालमेल है तो सब कुछ ठीक नजर आता है मगर कभी कभी इनमें…