ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  बाँध बैठे सर कफन वीरो की टोली एक दिन, फिर खुशी से मौत उनको है चूमती एक दिन।   कर रही है आज राधा,श्याम का इंतज़ार भी, श्याम के…

गीत (माँ का प्यार दुलार) – मधु शुक्ला

  माँ का प्यार दुलार जगत में , निर्मलता बरसाता है। त्याग, क्षमा के पुष्पों द्वारा, अवचेतन महकाता है।   रिश्तों का संसार हमारी , करनी का प्रतिफल देता। सहयोगी…

मातृ दिवस – क्षमा कौशिक

सबसे पहले नमन हमारा भारत माता को। जिसकी माटी में जन्में उस भाग्य विधाता को।।   खेल कूद कर बड़े हुए जिसकी रज चंदन में। शब्द नहीं जो अर्पित कर…

माता भाग्य विधाता (आल्ह छंद ) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  माँ जननी माता या माई, मदर बोलता है संसार। अलग बोलियों भाषाओं में, दिए नाम हैं कई हजार।1   सबके नयनों में बसता है, जन्मदात्रि का रूप अनूप, गर्भ…

प्रोपेगेंडा और झूठी ख़बरों से सतर्क रहें – प्रियंका सौरभ

  Vivratidarpan.com – युद्ध के दौरान फैलाई गई झूठी खबरें न केवल सैनिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि समाज में भय और नफरत का…

शब्दों की गुल्लक, भावों का प्रवाह – सुधीर श्रीवास्तव

vivratidarpan.com – युवा कवियित्री एकता गुप्ता ‘काव्या’ का एकल काव्य संग्रह ‘शब्दों की गुल्लक’ एक अनुभूति है। जिसे कोरोना काल में लेखन से पहचान बनाने वाली एक युवा कवयित्री के…

कितने दूर कितने पास – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) हम कितने दूर, कितने पास पूछो जरा तुम दिल से यार  ! कहो कुछ तुम, सुनें कुछ हम…., कितना करते हो, तुम हमसे प्यार  !!  …

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  वतन पर जान मैं दे दूँ,यही पैगाम हो जाए, फिदा कर दूँ वतन पर आज मेरा नाम हो जाए।   सुनो ये चाँद सा चेहरा जो  देखूँ शाम हो…

पूर्णिकांश – श्याम कुंवर भारती

बदला सिंदूर का – गरजा है रफाल पाक में बरसाकर बम दुश्मनो में कोहराम मचा दिया। लिया बदला सिंदूर कर सफाया आतंक स्वर्ण अक्षरों इतिहास रचा दिया। सलाम है भारत…

बुजुर्ग – रेखा मित्तल

मैं हँसूंगी नहीं, समझते मुझे तुम सब न पढ़ जाते हो मेरा मन मिलने का वक्त भी कुछ है कम एक दिन जब मेरा अस्तित्व हो जाएगा तब्दील एक राख…