गीतिका – मधु शुक्ला

  रिवाजों से शिकायत का चलन जग में पुराना है, बुजुर्गों की इसी तकनीक से मौसम सुहाना है।   सुखी परिवार का आधार ममता,एकता होती, इसी सच के वरण द्वारा…

विश्व युद्ध की आहट – श्याम कुंवर भारती

  सुनाई दे रही है फिर से विश्व युद्ध की अब आहट मुझको। ईरान और इजराइल जंग से हो रही अकुलाहट मुझको।   बंट रही है दुनिया देखो दो खेमे…

दोहे – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  देवतुल्य है हर पिता, वह जीवन का मूल। वह पराग के तुल्य है, जिससे खिलते फूल।।1   संतति को देता सदा, गहन वृक्ष सम छाँव। कष्ट न हो संतान…

मैं ही पावस बनकर आई – अनुराधा पाण्डेय

  मैं ही पावस बनकर आई । ख्वाबों के मृदु छोर क्षितिज से, यादों को अँजुरी में भरकर , सुधियों के स्यंदन पर चढ़कर, धवल गिरी से उतर-उतर कर ,…

एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा ? – गुरुदीन वर्मा

  एक कागज को फाड़ देने से क्या होगा, मैंने तो तेरा एक इतिहास लिख दिया है। एक तस्वीर को तोड़ देने से क्या होगा, मैंने तो तेरा दिल ही…

पंचायत चुनाव – पूजा मेहरा

  बिगुल चुनावी बज गया , लम्बी लगी कतार, टिकट जुगाड़ू सक्रिय, वादों की बौछार। टिकट जिसका कट रहा, मिमियावे चहु ओर, जिसकी लग रही लॉटरी, वह है आत्मविभोर। कोई…

चौंच भर प्यास –  प्रियंका सौरभ

  कोई पानी रख दे, कटोरे में भरकर, मैं भी जी लूं ज़रा, इस तपते शहर में। ना पुकार है मेरी किसी हैडलाइन में, ना नाम मेरा किसी एनजीओ के…

संसार से भागे फिरते हो – सविता सिंह

  क्यों मन मलिन तेरा सखे याद किसी की आई है? बैठे हो सरि के कूल पर या दिखती परछाई है। क्यों अचंभित हो गए तुम यह नूपुर नहीं मन…

रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए – डॉ सत्यवान सौरभ

  Vivratidarpan.com – रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को ‘होम-डिलीवरी’ में बदल दिया है। दिलचस्पी कम…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  प्यार की समझो हकीकत दोस्तो, अब न करना तुम शिकायत दोस्तों।   प्यार समझो क्यो इबादत दोस्तों, जान लेवा है मुहब्बत दोस्तों।   प्यार करते है सनम हम आपसे,…