कर्नल प्रवीण शंकर – हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार आदरणीय विष्णु प्रभाकर की 113 वी जयंती के उपलक्ष्य में गाँधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा “सन्निधि संगोष्ठी” के पावन सभागार में एक भव्य…
यह धरती हमारी है माता। यह देश हमारा है पिता।। जिसने जन्म दिया है हम सबको। ओरे लोगों, नहीं तुम भुलावो उसको।। यह धरती हमारी———————–।। लेकर दुःख बदले…
लगा ली दर पे ये अर्जियाँ हैं, बता दो मेरी क्या गलतियाँ हैं। जमाने को दिखती खामियाँ हैं, कि रौनकें होती बेटियाँ हैं। महक उठी बेटियों से…
तुम चाहे मानो मत मानो , पर मेरा विश्वास अटल है । मज़हब अगर नहीं होते तो ,रूप जगत का न्यारा होता ।। जाति धर्म के बंध न होते ,…
लगता है ये मेघ मेरी तरह है, कभी बेमौसमी उमड़ते है, जैसे मेरे मन के भाव हो, कभी टपकते है धीमे- धीमे, ओस की ठंडी बूंदें बनकर, जैसे आंखों…
जीवन में संघर्ष हैं कितने, साहस का है कितना खेल, जीवन का सच समझाता, साँप सीढ़ी का अद्भुत खेल। समृद्धि की सीढ़ी चढ़ते, पासों की गिनती से सारे,…
योग भगाए रोग सब, करता हमें निरोग। तन-मन में हो ताजगी, सुखद बने संयोग।। योग साधना जो करे, भागे उसके भूत। आलस रहते दूर सब, तन रहता मजबूत।।…
( 1 ) करें योग बने रहें निरोग, और अपने ‘ स्व ‘ में रहें स्थित सदा ! है स्वस्थ शरीर ये श्रीप्रभु मंदिर के समान.., और इसके बने हम…
हाल अपना जता दिया होता, आह दिलसे मिटा दिया होता। प्यार में दुश्मनी नहीं अच्छी, नफरतों को दबा दिया होता। रात-दिन प्यार में तड़प कैसी, कर इशारा…
लौट आना स्वीकार्य भी है और अनिवार्य भी लौट आना हमेशा निर्बल या निरीह नहीं होता, लौट आना उन रिक्त जगहों पर रंगों के कुछ छींटों को उड़ेलना जैसा…