काम होते गए ख़ुशी मिलती गई – पीयूष गोयल

  vivratidarpan.com – एक कस्बें में एक  ग़रीब परिवार अपने इकलौते बेटे के साथ रहता था, उनकी पंसारी की एक छोटी सी दुकान थी.बेटा उनकी शादी के १५ साल बाद…

कहानिका हिंदी पत्रिका का योग संगीत एवं वैदिक संस्कृति कवि सम्मेलन

vivratidarpan/com – कहानिका हिंदी पत्रिका के झारखण्ड अध्याय पर 26 जून 2025 को संध्या 6.00 योग एवं संगीत दिवस पर झारखंड अध्याय द्वारा आभासी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ।…

अंतस का मौन- ज्योत्स्ना जोशी

  एक अगुंजित स्वर हठीले जिद की तरह मेरे अंतस के मौन से निरन्तर टकराता हुआ, कि हिस्सों और किस्तों में आखिर क्यों मेरा अस्तित्व विभाजित हो प्रश्नोत्तरी की इस…

रंग-बिरंगे सपने – डॉ. सत्यवान सौरभ

रंग-बिरंगे सपनों की उड़ान, हँसते-खिलखिलाते बचपन का गान। छोटी-छोटी मुस्कान, नन्हें-नन्हें पंख, आसमान छूने की बस एक छोटी सी चाह। चिड़िया सी फुर्ती, तितली सा रंग, हर रोज़ नया सीखें,…

किरदार – राजेश कुमार झा

  शीशे की तरह साफ। किरदार है हमारा।। तुम फिर भी ना समझ पाए। तो क्या दोष है तुम्हारा।। हम तो बस साफ-साफ बोलते हैं। ना किसी के मन और…

यति मातु वैष्णवी – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  वैष्णवी दुःख तारिणी सर्व कष्ट निवारिणी, जग के संकट माते आप दूर करें अभी।   याचक से द्वार तेरे विपदा अनेक घेरे, मात हम भक्तों पर दृष्टि डालिये कभी।…

मेरी तरहा क्या तुम्हें भी – गुरुदीन वर्मा

  मेरी तरहांक्या तुम्हें भी, कोई गम तो नहीं है। मेरी तरहा तुम पर भी, कोई सितम तो नहीं है।। मेरी तरहांक्या तुम्हें भी————————।।   ऐसी किस्मत तो हमको यार,…

“जब व्यवस्था प्रेम को निगल गई: मंजू वर्मा की आत्मकथा पर एक दृष्टि” – प्रियंका सौरभ

  vivratidarpan.com – प्रेम की सबसे सच्ची परीक्षा तब होती है जब वह समय, समाज और सत्ता की सख्त दीवारों से टकराता है। ‘राज सर आईपीएस’ केवल एक प्रेम कथा…

संकेत साहित्य समिति की काव्य फुहार व सम्मान समारोह संपन्न

vivratidarpan.com बिलासपुर – संकेत साहित्य समिति बिलासपुर छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में दिनांक 24.06.2025 को राजकिशोर नगर में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि कवि संगम त्रिपाठी,…

मन की बातें – सविता सिंह

  करती हूँ जिससे मैं अपने मन की बातें, वो एक रफ कॉपी अरु ढेर सारी किताबें। उस रफ कॉपी के पन्नों पर दिखता अतीत जीते उन क्षणों को समय…