मंदिर सोमनाथ — नीतू रानी

सोमनाथ केअ शोभायात्रा में निकललखिन्ह प्रधानमंत्री सरकार हे बहिना, संग में मंत्री दुई चार। एक सौ अठारह घोड़ा पर बैसल सैनिक राज कुमार हे —–2, रथ में खड़ा भेल प्रधानमंत्री…

लोहड़ी – रुचि मित्तल

धुंधली शाम में आग जलती है चुपचाप। लकड़ियाँ फटकती हैं चिंगारियां उड़ती आसमान की ओर। खेतों से आती फसल की खुशबू गेहूं के सुनहरे दाने सरसों के फूलों की पीली…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

देते  दुआ है सबको लब पे हँसी  लिखी हो, ए काश ग़म़ न आए, बस मस्ती लिखी हो।   क्यों चाँद आज हमको आँखें बड़ी दिखाएँ, किस्मत में यार जिसके…

ना समझ सी मैँ – रेखा मित्तल

नासमझ सी मैँ पता नहीं सुधर रही हूँ या बिखर रही हूँ थक गई हूँ समझाते-समझाते नहीं दिखा सकती अपने मन की बेचैनियाँ अधकचरे ख्वाबों की दास्ताँ जीवन के इस…

तिथि – सविता सिंह

कुछ तिथियाँ कैलेंडर में नहीं होतीं, वे हृदय में दर्ज होती हैं। उन दिनों मन उदास नहीं होता, बस उनके पास चला जाता है। जनवरी फिर आ गया है। कैलेंडर…

इक साल कम हो गया – विनोद निराश

सुनो जी ! लोग कहते थे, मगर अब सच लगने लगा, पुराना साल विदा क्या हो गया ?, मेरी ज़िंदगी का इक साल कम हो गया। वो चन्द पुरानी यादें,…

भोजपुरी पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

होई जे भ्रष्टाचारी गोड़ में बेड़ी कानून के त लगबे करी। कर्तव्य से करी जे बेइमानी हाथ हथकड़ी त पड़बे करी।   नेता होखे भ अधिकारी सरकारी जिम्मेवारी बड़ होला।…

ग़ज़ल – मणि अग्रवाल

चाह भी  ख़ूब है, आह भी ख़ूब है।   हर ख़ुशी के लिए, डाह भी  ख़ूब है।   झूठ   का  टूटता, ब्याह भी ख़ूब है।   अक्षमों को यहाँ, वाह…

गीत – अनिल भारद्वाज

बने राष्ट्रभाषा हिंदी यह है संकल्प हमारा, हिंदी के प्रतिभा मंडल का फैल रहा उजियारा। हिंदी के हाथों के कंगन जब जब बजे उठते हैं, सूरज चांद सितारे नभ में…

मेरे सपने – सुनील गुप्ता

( 1 ) चलूँ सजाए नववर्ष के सपने, हैं मेरे मन में हज़ार सपने !! ( 2 ) करूँ विचार चलूँ उनके अनुसार, तो, होंगे सपने सभी साकार !! (…