नहीं चाह महलों और अट्टालिकाओं की न ही सजे हुए बेशकीमती झाड़फानूसों की केवल सुकून तुम्हारी बलिष्ठ भुजाओं का मुझे तो तुम्हारा साथ चाहिए था जीवन की अंधेरी लंबी रातों…
मित्र मृदुल मनहर मनभावन। स्नेहिल भाव लगे जग पावन।। मित्र बिना सूना यह जीवन। सच्चा मित्र लुभाये तनमन।। मित्र मित्रता हीं जीवन धन। मित्र कभी ना चाहें अनबन।। मित्र…
vivratidarpan.com – प्रेम पथिक एक ऐसा साझा गीत संग्रह है जिसके मुख्य संपादक डॉ. नरेश सागर हैं। इसमें 31 कवि और कवियित्रियों के गीतों को संक्षिप्त जीवन-परिचय के साथ सम्मिलित…