फागुन के रंग – सविता  सिंह

कितनी बीती पूस की रातें, कितने स्वप्न बसंत के, याद दिलाती हर फागुन वो, अंतरमुखी प्रिय उस कंत के। पीली सरसों, पीत अमलतास, बिखरे धरा पर रक्तिम पलाश, हर रंगोत्सव…

बुरा न मानो, होली है – सुनील गुप्ता 

( 1 )कोई बुरा न मानें, होली है…, हमने अपनों संग खेली होली है !! ( 2 ) चोरी नहीं ये सीनाजोरी है…, भरी पिचकारी रंगों की डाली है !!…

गंगांजलि साझा संग्रह समाजसेवी लालचंद पाण्डेय को भेंट किया – कवि संगम त्रिपाठी

vivratidarpan.com जबलपुर – गंगांजलि साझा काव्य संग्रह समाजसेवी लालचंद पाण्डेय कौशांबी को कवि संगम त्रिपाठी ने भेंट किया। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह के संपादक डॉ अजय शुक्ल है व इस…

यह फागुन मास बहार लगे – अनिरुद्ध कुमार

यह फागुन मास बहार लगे, हुक प्रेम उठे चितकार लगे। मन रंग सजा हर नार लगे, यह बाहर भीतर प्यार लगे। झकझोर हवा गुलनार लगे, हर फूल कली कचनार लगे।…

आया होली का त्यौहार – हरी राम यादव

धरती धानी रंग में सजी हुई, धारे लाल रंग का बंदनवार। ढाख पलास रंगबाज बने, कनक झूमे हरी संग बयार। आया होली का त्यौहार।। मन मगन हो कोयल गा रही,…

भोजपुरी होली गीत – श्याम कुंवर भारती

हे छलिया भागी पराइल कहा चढ़ले फगुनिया ना । कब से देखे छछनाइला मंद मुस्कनिया ना। तू त कही के गइला कान्हा, हम त हाली लौटी आइब राधा । एही…

सररर होली – सुनील गुप्ता 

( 1 ) है मतवाली ये सररर होली., करें ठिठोली !! ( 2 ) पावन होली मिलाए हमजोली., लगाएं रोली !! ( 3 ) सजा रंगोली मन बगिया कली., खिलती…

फागुन आयो रे – वैशाली रस्तोगी

फागुन आयो रे, रंगों का संदेशा लाया, सूखी डालियों पर भी उसने गीत सजाया। पीली-पीली सरसों हँसकर खेतों में बोली, धरती ने ओढ़ी चूनर, मन ने बाँची होली। बयार संग…

रंगों में छुपा प्यार – रोहित आनंद

फागुन की आई मधुर बहार, रंगों से सजा है सारा संसार। नदी किनारे बैठी राधा प्यारी, मन में छुपाए प्रीत हमारी। जल में देखे श्याम की छाया, नीले रंग में…

आराधिका साहित्यिक मंच की रंगोत्सव गोष्ठी संपन्न।

vivratidarpan.com इस्लामपुर (प. बं.) :: आराधिका साहित्यिक मंच ( पंजी), 28/02/2026 को रंगोत्सव पर आयोजित 61 वीं आभासी राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी भव्यता के साथ संपन्न होगई। रंगोत्सव काव्य गोष्ठी का…