माँ वाणी की महिमा गाऊँ। दर पर प्रतिदिन शीश झुकाऊँ।। सच्चे मन से है अभिनंदन। स्वीकारो माँ मेरा वंदन।। श्वेत वसन तन पर हैं शोभित। कंकण कुण्डल करते मोहित।।…
दो घड़ी हम साथ बैठे मुस्कराने के लिए, आ गई इल्ज़ाम दुनिया क्यों लगाने के लिए। आपकी आँखें हैं मेरी ख़्वाबगाहें आजकल, और पलकें शामियाना सर छुपाने के लिए।…