खुशी मुझको भी हो रही है – गुरुदीन वर्मा

  खुशी मुझको भी हो रही है, कि तुमने भी समझ लिया है, जीवन का ध्येय, और उत्सुक है तुम्हारे नेत्र, अपने लक्ष्य की तस्वीर देखने को, उतावले हैं तुम्हारे…

तुम बिन- सविता सिंह

  जरा थमना अभी चंदा, तनिक श्रृंगार है बाकी, मिलन था बस क्षणिक भर का, अभी अभिसार है बाकी, मधुर मनभावनी बेला अजी कब लौट कर आये। ठहर जा चन्द्रमा…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

  आग में अब घी मिलना छोड़ दे । दूसरों के घर जलाना छोड़ दे ।   हो गया बर्बाद तू इस शौक में , बेवज़ह लड़ना लड़ाना छोड़ दे…

होगा सिर्फ उल्लास – नीलांजना गुप्ता

  लोग कहते हैं कि दुनियाँ, होती जा रही है उदास,खामोश। डूबते हुए सूरज के साथ, मैंने भी कुछ ऐसा ही सोचा और निकल पड़ी उदासी की तलाश में। मैदान…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

  इस दिल की धड़कनो मे बसा प्यार आपका, खुशियां मिले सदा ,रहे इख्लास आपका।   करते रहे फर्याद खुदा से भी हम सदा, छूटे न जिंदगी से ये दरबार…

भाव का अटूट हिस्सा – ज्योत्सना जोशी

  vivratidarpan.com – अपने मन की सारी की सारी छटपटाहट तो अपने सबसे प्रिय से भी सांझा नहीं करनी चाहिए मैं ऐसा मानती हूं, और प्रेम में प्रेम ज़ाहिर करने…

बुंदेली साहित्य के मौन साधक डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव – विवेक रंजन श्रीवास्तव

vivratidarpan.com बुंदेलखंड – ईसुरी बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध लोक कवि हैं ,उनकी रचनाओं में ग्राम्य संस्कृति एवं सौंदर्य का चित्रण है। उनकी ख्‍याति फाग के रूप में लिखी गई रचनाओं के लिए…

सावन की अप्रतिम यादें – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) आया झूमके सावन बरसी प्रेम खुशियाँ…, छायी चहुँ ओर अप्रतिम यादें !!   ( 2 ) झूमा मन कानन खिल उठी कलियाँ, चला मन मयूर नाचे …

परछाइयां – प्रियंका सौरभ

  भूत की परछाइयों से कब तक यूं घबराओगे, आने वाले सवेरे को कैसे फिर अपनाओगे। छोड़ दो बीते पलों का बोझ मन की गठरी से, वरना नए सपनों का…

शुभ गणेशोत्सव: – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

आदि देव प्रभु को कहें, सर्वप्रथम लें नाम। लंबोदर को पूज कर, करते बाकी काम।। गौरी सुत हर वर्ष घर, खुशियाँ लाते संग। उत्सव में तन मन रँगे, भरती नवल…