कवित्त – (गंगा पीड़ा) – जसवीर सिंह हलधर

  शिव की जटाओं संग ,गिर की लटाओं संग । मात पार्वती संग ,सोई थी माँ की लली ।। भागीरथ ने बुलाई ,सिन्धु से मिलन आई । चट्टानों से टकराई…

आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) पर हिंदी विषयक काव्य गोष्ठी संपन्न

vivratidarpan.com इस्लामपुर (पश्चिम बंगाल) – आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) के तत्वावधान में 07 सितंबर’ 2025 को 48 वीं ‘हिंदी दिवस’ विषयक भव्य आभासी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जो…

कह के रहेंगे – सुनील गुप्ता

  ( 1 ) बाढ़ ही बाढ़ चहुँ ओर देख के, डर सा लगे !!   ( 2 ) जलाशय सा बना आँगन देखें, इंद्र को कोसें !!   (…

सरी, तटिनी,, पयस्विनी –  सविता सिंह

  नहीं है ख्वाहिश की सागर से जा मिलूँ अभी कुछ और लोगों की प्यास बुझे कुछ और बहुँ मैं अभी। फेंक दे मानव अपनी उत्कंठा और वेदना इस बहाव…

शुभ गणेशोत्सव – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

  सुखकर्ता प्रभु आप बन, जीवन रहे सँवार। बन दुखहर्ता हर रहे, संकट कई हज़ार।।   कृपा दृष्टि जब आपकी, पाता घर परिवार।। काम क्रोध मद नाश कर, रचें सुखी…

कैसे कह दूँ – प्रियंका सौरभ

  कि मैं एकलौती नहीं? हर बेटी, हर बहन, हर माँ, इस दोहरी सोच की बेड़ियों में जकड़ी है, जो प्रेम से पहले, संपत्ति से तौली जाती है।   कभी…

ठुमरी गीत – श्याम कुंवर भारती

  सइयां दिल लुट गए दर्द मैं सुनाती रही। जाम इश्क छलकाने लगें मै पिलाती रही। सइया दिल लुट गए………….।   वैरी सावन रिमझिम बरसे बदन अगन जलाए। रूठे पिया…

तुलसी इस संसार में भांति भांति के लोग (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी

vivratidarpan.com – जिसे भी देखिए वह अपने अपने विमर्श लिए घूम रहा है। वह समझता है कि उससे अधिक ज्ञानी ध्यानी संसार में कोई दूसरा नहीं है। वह जिसका चाहे अपमान…

गीतिका  – मधु शुक्ला

  कर रहा हरितालिका व्रत हर्ष का संचार, शिव विराजे हर सदन में हो रही जयकार।   अर्चना शिव पार्वती की और मंगलगान , देश भारत में यही हैं ब्याह…

चंदा मामा – डॉ. सत्यवान सौरभ

  चंदा मामा चमके आसमान में, टिमटिमाते तारे संग-साथ। माँ की लोरी सुनें मीठी, नींद में खो जाएं रात।   नन्हे-नन्हे सपने सजाएं, चाँद की रोशनी में नहाएं। सुबह की…