तानसेन आ जाओ – अनिल भारद्वाज

धरती अंबर चांद सितारे साथ तुम्हारे गाते, तानसेन आ जाओ तुमको मेरे गीत बुलाते। तुम जब मेघ राग गाते थे धरती गगन झूम जाते थे, लगता जैसे सावन आया बदरा…

सर्दियों का आगमन – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

शीत का हो गया है पुनः आगमन, रात लंबी घटें दिन लगा ज्यों ग्रहण।   नित्य गिरता रहे न्यूनतम ताप अब, बेबसों को सताये निशा की गलन।   वस्त्र सब…

कौन सुनेगा, किसको सुनाए कबीर सी खरी खरी – डॉ. सुधाकर आशावादी 

vivratidarpan.com – कबीर जब तक थे, खरा खरा बोलते थे। कागज कलम का उपयोग करते थे या नहीं, यह शोध का विषय है। कबीर के दोहे, धर्म, जाति, क्षेत्र की संकीर्णता…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

ओढ़कर गांधी लबादा एक घर आबाद है । बोस का संघर्ष बोलो क्या किसी को याद है । इंडिया भारत बताया चाल तो देखो जरा , इस तरह का विश्व…

नदी – निहारिका झा

आओ तुमको आज सुनाऊं अपने उद्गम की मैं  कहानी कोई नदी कहता मुझको कोई  मुझे  कहता तटिनी कहीं कहें सरिता, सलिला बस प्रवाह है मेरा काम ऊंचे पर्वत से मै…

ज़िंदगी – सविता  सिंह

ज़िंदगी कुछ करते हैं दृगों के अंजन बिखरा-सा यह बिसरा मन, कुछ अधूरी-सी है शायद शायद ही है यह जीवन। लट अब ये उलझी-उलझी कभी-कभी कुछ भी न सूझे, जाने…

कविता – ज्योती कुमारी

आधुनिकता की इस तेज़ रफ़्तार में अब ऐसा चलन है, कि चंदा मामा भी दूर नहीं — बस “टूर” भर का सफ़र है।   शरद पूर्णिमा पर खीर का भोग…

जब कभी देखोगे तुम खत ये – गुरुदीन वर्मा

जब कभी देखोगे तुम खत ये, हैरानी तुमको बहुत तब होगी। जब कभी सुनोगे तुम गीत ये, परेशानी तुमको बहुत तब होगी।। जब कभी देखोगे तुम खत ये—————–।।   कितना…

भोजपुरी गीत – श्याम कुंवर भारती

  सुना हो गौरा तोर सइयां हम देख अईली। बौराहा दूल्हा सखी सब परीक्षन अइली।   दुअरें अइले शिव अड़भंगी के देखली। देखी दूल्हा सखी गिरत पड़त सब भगली। पिटे…

ग्रीन सिटी का सपना – डॉ. सत्यवान सौरभ

सड़कें साफ़, पेड़ हों हरे, ग्रीन सिटी बनाएं सब मेरे। साइकिल चलाएं, कार कम करें, स्वच्छ हवा हम सब में भरें।   कचरा न फैलाएं, रिसाइक्लिंग करें, धरती माँ की…