गौरैया की पुकार – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

छोटी सी चिड़िया, प्यारी सी गौरैया, आँगन में गूंजे उसकी मधुर मुरैया। फुदक-फुदक कर दाने चुनती, हर पल अपनी दुनिया बुनती। कभी छज्जे पर, कभी पेड़ की डाली, उसकी चहक…

हँसी जो उम्मीद बन गई – अमित कुमार

सोशल मीडिया की हर रील में एक हँसी गूंजती है — खिलखिलाती, सच्ची, जैसे सूखी धरती पर पहली बारिश। वह हँसी अरुण की है… तेलंगाना की धूप में तपे एक…

हिंद नव वर्ष – बसंत श्रीवास

महक उठे धरा पर खुशबू , और खुशियों की बरसात हो । चैत मास के पावन महीना, नव वर्ष की शुरूआत हो।।   सत्य सनातन हो तन-मन में, तो दुश्मन…

शून्य – डॉ रेखा मित्तल

मैं शून्य पर खड़ी थी अहसास गहरे थे पर जमीन अपनी न थी कहने को तो सब अपने पर कोई अपना न था शून्य से शुरू की जिंदगी कुछ खोने…

चाँद पर हो आशियाँ – रुचि मित्तल

चाँद पर हो आशियाँ जहाँ सिर्फ मैं और तुम हो और दूसरा कोई बंधन न हो जहाँ रास्ते कदमों से नहीं नियत से खुलते हों जहाँ नाम आवाज़ न माँगे…

संघर्ष – सविता सिंह

लोग समझते हैं ये घाव देता है पर सच कहूँ ये तो मेरे कंधे पर हाथ रखकर चलता रहा है बरसों। मैं अक्सर मुस्कुराती दिखती हूँ पर मुस्कान की तहों…

मेरी कलम से – डॉ क्षमा कौशिक

उदासी क्यूँ अरे मन देख, पतझर बीत जायेगा। लिए झोली भरी रँग की, पुनः मधुमास आयेगा।। गिरेंगी पत्तियाँ सूखी, नवल तरु को सजायेंगी। नया धर रूप शाखों पर, कली फिर…

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

धूप कारागार में नकली उजाले रह गए । हाशिए पर आम जनता के हवाले रह गए ।   बात थी अधिकार के उपयोग की मतदान में , पर यहां तो…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आज मिलता है कहाँ सब कुछ नसीबों से। करनी पढती है मशक्कत आज लोगों से।   चाँद भाता आज भी अपनी अदाओ से। खूबसूरत  वो लगे  हमको निगाहों से।  …

मेष संक्रांति – सुनील गुप्ता

( 1 ) है पुण्यकारी मेष संक्रांति पर्व., मंगलकारी !! ( 2 ) यह संयोग शिववास का योग., जगाएं जोग !! ( 3 ) करें प्रार्थना सूर्य की उपासना., ध्यान…