छोटी सी चिड़िया, प्यारी सी गौरैया, आँगन में गूंजे उसकी मधुर मुरैया। फुदक-फुदक कर दाने चुनती, हर पल अपनी दुनिया बुनती। कभी छज्जे पर, कभी पेड़ की डाली, उसकी चहक…
उदासी क्यूँ अरे मन देख, पतझर बीत जायेगा। लिए झोली भरी रँग की, पुनः मधुमास आयेगा।। गिरेंगी पत्तियाँ सूखी, नवल तरु को सजायेंगी। नया धर रूप शाखों पर, कली फिर…