गृहायुद्ध (पुस्तक चर्चा)  – विवेक रंजन श्रीवास्तव 

vivratidarpan.com – यह उपन्यास समकालीन भारतीय नौकरशाही और सरकारी आवास-व्यवस्था की जटिल दुनिया का उसे समझकर भीतर से किया गया सूक्ष्म चित्रण है। लेखक स्वयं प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहे हैं,…

धर्म ध्वजा – सुधीर श्रीवास्तव

पच्चीस नवंबर दो हजार पच्चीस का दिन जब अयोध्याधाम में जन-जन के राम प्रभु श्रीराम के भव्य-दिव्य मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा पूरी गरिमा से फहराया गया, उस पल…

बच्चों की स्मार्ट क्लास – डॉ. सत्यवान सौरभ

  स्क्रीन पर चलती क्लास हमारी, टीचर पढ़ाएं बातें प्यारी। वीडियो देख-देख कर सीखें, नया ज्ञान सब साथ में बाँटें।   माउस से क्लिक, की-बोर्ड से टाइप, पढ़ाई में करें…

टूटे हुए पत्थर – रश्मि मृदुलिका

टूटे हुए पत्थर समझ कर, जिन्हें उपेक्षा से तुमने फेंक दिया था, वो मेरे भावों के मनके थे, तुम नौसिखिये जौहरी की तरह, आत्ममुग्धता में मग्न थे, तुम्हें लगा तुम…

आंसुओं का गीत – प्रियंका सौरभ

  जब हर दर्द से टकराकर, मन की दीवारें दरकने लगें, और उम्मीदों की चादर, चुपचाप सरकने लगे।   जब हँसी की परतें, ग़म के नीचे दब जाएं, और खामोशी…

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

काश औलाद शान हो जाए। घर सभी बागबान हो जाए।   आज खुशियां मिली बहाने से। आपको प्यार जान हो जाए।   प्यार बेटी को तुम सदा करना। घर मे…

कड़वा सच – ऋतुबाला रस्तोगी

एक पूरी कौम जिसका, काम दहशत और हत्या। एक ऐसी नस्ल जिसकी, सोच नफरत और हत्या।   है फरेबी नाम बदले, हर घड़ी बदले ठिकाना। सीखती है बचपने से,कर मुहब्बत…

मुक्तक – श्याम कुंवर भारती

परवाह मेरी<> मैने दिल लगाया भी किससे जिसे प्यार की परवाह ही नहीं। चाहा कितना उसे जान से ज्यादा जिसे मेरी कोई चाह ही नहीं। दर्द ही दिया तड़पाया और…

अला अल-फलाह – सुनील गुप्ता

अल-फलाह रास्ता दिखलाते हैं, अल-इलाह  !!1!!   थे वह कौन जो पीछे छोड़ गए, मौत तबाही !!2!!   ख़ुदा बख्श दे या दे ज़रा सद्बुद्धि, इन्हें इलाही !!3!!   ईश्वर…

उठ गया विस्वास – नीलांजना गुप्ता

एक झोंके की तरह यह उड़ गया है। बर्फ के जैसे पिघल कर गल गया है। पक्षी थक कर गिर गया हो जैसे नभ से ।।   हुआ धूमिल भोर…