मित्र मृदुल मनहर मनभावन। स्नेहिल भाव लगे जग पावन।। मित्र बिना सूना यह जीवन। सच्चा मित्र लुभाये तनमन।। मित्र मित्रता हीं जीवन धन। मित्र कभी ना चाहें अनबन।। मित्र…
vivratidarpan.com – प्रेम पथिक एक ऐसा साझा गीत संग्रह है जिसके मुख्य संपादक डॉ. नरेश सागर हैं। इसमें 31 कवि और कवियित्रियों के गीतों को संक्षिप्त जीवन-परिचय के साथ सम्मिलित…
vivratidarpan.com – यह उपन्यास समकालीन भारतीय नौकरशाही और सरकारी आवास-व्यवस्था की जटिल दुनिया का उसे समझकर भीतर से किया गया सूक्ष्म चित्रण है। लेखक स्वयं प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहे हैं,…